ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद फिर भी नहीं जागे जिम्मेदार तीन सचिव अब भी बिना ग्राम पंचायत के, ग्रामीण परेशान…….
मोहनलालगंज, लखनऊ। विकासखंड मोहनलालगंज में पंचायत सचिवों के क्लस्टर आवंटन को लेकर लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्था पर प्रशासन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है। इस संबंध में खबर पहले भी प्रकाशित की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जिला स्तर के अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। नतीजतन तीन पंचायत सचिव आज भी बिना किसी ग्राम पंचायत के ब्लॉक कार्यालय से संबद्ध हैं, जबकि कई सचिवों पर दो-दो क्लस्टरों का अतिरिक्त कार्यभार है। इससे विकास कार्यों के साथ-साथ ग्रामीणों को मिलने वाली मूलभूत सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।जानकारी के अनुसार विकासखंड मोहनलालगंज में कुल 31 पंचायत सचिव तैनात हैं। इसके बावजूद तीन सचिवों को अब तक किसी भी ग्राम पंचायत का कार्यभार नहीं सौंपा गया है और वे केवल ब्लॉक कार्यालय से संबद्ध रहकर वेतन प्राप्त कर रहे हैं।वहीं दूसरी ओर करीब पांच पंचायत सचिवों को दो-दो क्लस्टरों का जिम्मा सौंपा गया है। प्रत्येक क्लस्टर में दो से तीन ग्राम पंचायतें शामिल हैं। ऐसे में इन सचिवों के लिए सभी पंचायतों में नियमित रूप से पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीणों को जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, निवास संबंधी अभिलेख और अन्य पंचायत संबंधी कार्यों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक पूर्व खंड विकास अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव ने बिना पंचायत आवंटन वाले सचिवों को ग्राम पंचायतें आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार कर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय भेजा था। इसके बाद वर्तमान खंड विकास अधिकारी शिवकुमार ने भी चार जुलाई को तीनों बिना क्लस्टर वाले पंचायत सचिवों के आवंटन का प्रस्ताव दोबारा डीपीआरओ कार्यालय भेजा, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इस देरी से विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि तीन सचिव खाली बैठे हैं तो उन्हें तत्काल ग्राम पंचायतों का आवंटन किया जाना चाहिए, ताकि अतिरिक्त कार्यभार से जूझ रहे सचिवों को राहत मिले और ग्रामीणों को समय पर सुविधाएं मिल सकें।
खंड विकास अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि बिना ग्राम पंचायत आवंटन वाले सचिवों के संबंध में प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि क्लस्टर आवंटन सचिवों की कार्यप्रणाली और प्रदर्शन को ध्यान में रखकर किया जाएगा। अब निर्णय जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय स्तर पर लिया जाना है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि मामला लंबे समय से लंबित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कोई गंभीर पहल नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक क्लस्टरों का निष्पक्ष और संतुलित आवंटन नहीं होगा, तब तक विकास कार्यों की गति प्रभावित होती रहेगी और ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
