(महिला प्रधान की शिकायत पर एसडीएम ने राजस्व टीम को मौके पर भेजकर जेसीबी मशीन से सरकारी जमीन पर किया अवैध पक्का निर्माण ढहवाया)
मोहनलालगंज।मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायतो में स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन से राजस्व विभाग की लापरवाही के चलते अवैध कब्जे थमने का नाम नही ले रहे है,मोहनलालगंज क्षेत्र के हुलासखेड़ा ग्राम पंचायत के पचौरी गांव में सड़क किनारे स्थित बेशकीमती दो बिस्वा बंजर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराये जाने की ग्राम प्रधान की शिकायत पर बीते रविवार को राजस्व टीम ने मौके पर जाकर कब्जा हटा दिया था लेकिन मनबढ दबंग किशोरी निवासी पचौरी व दुर्गेश निवासी मवईया थाना पीजीआई ने देर रात पक्का निर्माण कर सरकारी जमीन पर ऊंची दीवार खड़ी कर दोबारा कब्जा कर लिया।सोमवार की सुबह सरकारी जमीन पर दोबारा कब्जा होने की जानकारी होने के बाद प्रधान नीता सिंह ने एसडीएम अंकित शुक्ला से उनके कार्यालय में मिलकर लिखित शिकायत करते हुये अवैध कब्जा हटाये जाने की मांग की।जिसके बाद एसडीएम अंकित शुक्ला ने नायाब तहसील भानु प्रकाश त्रिपाठी को राजस्व टीम के साथ मौके पर जाकर तत्काल अवैध निर्माण ढहाने समेत कब्जेदारो पर एफआईआर दर्ज कराये जाने के निर्देश दिये।जिसके बाद नायाब तहसीलदार ने राजस्व व पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीन से सरकारी जमीन पर कराये गये पक्के निर्माण को ढहाकर कब्जा मुक्त कराया।हालाकि खबर लिखे जाने तक राजस्व टीम ने अवैध कब्जेदारो पर एफआईआर नही दर्ज करायी।ग्रामीणो की माने तो अवैध कब्जेदारो पर एफआईआर ना होने से वो बैखोफ होकर सरकारी जमीनो से अवैध कब्जा हटने के बाद दोबारा कब्जा कर लेते है।प्रशासन को जुर्माने के साथ कब्जेदारो पर एफआईआर जरूर दर्ज करानी चाहिए जिससे वो दुबारा सरकारी जमीनो पर कब्जा करने से पहले सौ बार सोचे।

इस घटना से स्पष्ट है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की समस्या गंभीर है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन एफआईआर दर्ज न होने से कब्जेदार बेखौफ हो जाते हैं। क्या यह सही है कि ऐसे मामलों में केवल निर्माण ढहाने तक सीमित रहा जाए? ग्रामीणों का मानना है कि जुर्माने के साथ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। क्या प्रशासन इस मामले में और सख्ती दिखाएगा? अगर ऐसा नहीं होता है, तो क्या यह समस्या बार-बार उठेगी? क्या इस मामले में ग्राम प्रधान की भूमिका और सक्रिय होनी चाहिए?