विवादित होर्डिंग को लेकर जताई कड़ी नाराजगी, बोले—धार्मिक आस्था और सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए विवादित होर्डिंग को लेकर किसान नेता अनमोल तिवारी ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि होर्डिंग में धार्मिक प्रतीकों तथा ब्राह्मण समाज की आस्था से जुड़े विषयों को आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। मामले को लेकर उन्होंने सपा नेतृत्व से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
अनमोल तिवारी ने कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद और विरोध लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी समाज की धार्मिक आस्था, पहचान और सम्मान को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाने वाले पोस्टर और होर्डिंग की भाषा एवं विषयवस्तु को लेकर राजनीतिक दलों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
विवादित होर्डिंग हटाने की मांग
किसान नेता ने कहा कि धार्मिक प्रतीकों से जुड़ी किसी भी सामग्री को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाना सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने सपा नेतृत्व से विवादित होर्डिंग को तत्काल हटाने तथा ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत होने पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। अनमोल तिवारी ने कहा कि ऐसे मामलों से समाज में अनावश्यक विवाद पैदा होता है और आपसी भाईचारे पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
राजनीतिक विरोध में मर्यादा जरूरी
अनमोल तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए राजनीतिक एवं सामाजिक मर्यादाओं का पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की आस्था और सम्मान को निशाना बनाकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने सपा नेतृत्व से पूरे मामले का संज्ञान लेकर विवादित सामग्री को हटाने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आने की व्यवस्था करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन धार्मिक आस्था और सामाजिक सम्मान से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
किसान नेता अनमोल तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री से है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे समाज में सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने वाली भाषा और विचारों को प्राथमिकता दें।
