- बंद कार में ब्लोअर बना जानलेवा, कस्बा इंचार्ज अनूप तिवारी की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
- कुछ मिनट और देर होती तो बुझ जातीं युवक की सांसें
लखनऊ। ठंड के मौसम में बंद कार में लंबे समय तक ब्लोअर चलाना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका जीवंत उदाहरण शुक्रवार को निगोहां थाना क्षेत्र में सामने आया। बीच सड़क पर खड़ी एक कार में बेहोश पड़े युवक की जान निगोहां पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से बचा ली गई। यदि कुछ मिनट की भी देरी होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।प्राप्त जानकारी के अनुसार निगोहां थाना के पास सड़क के बीच काफी देर से एक कार खड़ी थी। गश्त पर निकले कस्बा चौकी इंचार्ज दरोगा अनूप तिवारी को जब कार के अंदर कोई हलचल नजर नहीं आई, तो उन्हें संदेह हुआ। पुलिस टीम जब कार के पास पहुंची और अंदर झांक कर देखा, तो सभी के होश उड़ गए। चालक युवक सीट पर बेसुध अवस्था में पड़ा था।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि युवक ने ठंड से बचने के लिए कार के सभी शीशे बंद कर लंबे समय तक ब्लोअर चला रखा था, जिससे कार के भीतर ऑक्सीजन की कमी और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भर गई और युवक बेहोश हो गया।स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस ने बिना एक पल गंवाए ईंट से कार का शीशा तोड़ा और युवक को बाहर निकालकर उसकी जान बचाई। युवक की पहचान मीरकनगर गांव निवासी सरवन के रूप में हुई। पुलिस ने तत्काल परिजनों को सूचना दी और मौके पर पहुंचे परिजनों के साथ युवक को निजी अस्पताल भिजवाया गया।अस्पताल में समय रहते इलाज मिलने से युवक की हालत में सुधार हुआ और उसकी जान बच गई। परिजनों ने निगोहां पुलिस, विशेष रूप से कस्बा इंचार्ज अनूप तिवारी की सक्रियता की खुले दिल से सराहना करते हुए कहा कि यदि पुलिस कुछ मिनट और देर से पहुंचती, तो परिणाम घातक हो सकता था। मौके पर मौजूद लोगों ने भी पुलिस की तत्परता की प्रशंसा की।
बंद कार में ब्लोअर का प्रयोग बन सकता है जानलेवा……
विशेषज्ञों के अनुसार बंद कार में देर तक ब्लोअर चलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनने लगती है, जो शीशे बंद होने पर शरीर में सांसों के जरिए प्रवेश कर दम घुटने का कारण बनती है। बच्चों के लिए यह खतरा और भी अधिक होता है। पुलिस व विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि कार में ब्लोअर का सीमित प्रयोग करें और समय-समय पर शीशे खोलते रहें।निगोहां पुलिस की सूझबूझ ने न सिर्फ एक जान बचाई, बल्कि आमजन को एक अहम चेतावनी भी दी।
