लखनऊ। यूजीसी से जुड़े विवादित फैसले को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए अंतरिम रोक ने आंदोलनरत संगठनों को बड़ी राहत दी है। इस फैसले को राजपूत करणी सेना ने जनभावनाओं की जीत करार दिया है।श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ‘दीपू’ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय सामान्य वर्ग और युवाओं के भविष्य की रक्षा की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि करणी सेना लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की लड़ाई लड़ रही थी, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यूजीसी का फैसला बिना व्यापक विमर्श के लिया गया था, जिससे देशभर के युवाओं और आम नागरिकों में आक्रोश व्याप्त था। करणी सेना ने शुरू से ही इस निर्णय को अन्यायपूर्ण बताते हुए सड़क से लेकर संवैधानिक मंच तक विरोध दर्ज कराया।
दुर्गेश सिंह ‘दीपू’ ने बताया कि लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिलों में करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने संगठित होकर विरोध प्रदर्शन किए और सरकार का ध्यान जनभावनाओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रोक से यह साबित हो गया है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि संगठन अंतिम निर्णय तक पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए रखेगा। यदि भविष्य में जनहित के विपरीत कोई फैसला आता है तो करणी सेना प्रदेशव्यापी आंदोलन से पीछे नहीं हटेगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद यूजीसी को लेकर चल रहा विवाद नए मोड़ पर आ गया है और आमजन के साथ-साथ सामाजिक संगठनों में भी इस फैसले को लेकर संतोष और उम्मीद का माहौल है।
