पीजीआई, लखनऊ।सोमवार को एक बार फिर संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आई। रायबरेली–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-30 पर वाहनों का दबाव इतना बढ़ गया कि पीजीआई से लेकर मोहनलालगंज होते हुए जाम की कतार कल्ली पश्चिम कस्बा तक पहुंच गई। कई किलोमीटर लंबे इस जाम में लोग घंटों तक फंसे रहे।सुबह से ही सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं, जो दोपहर तक और भयावह हो गईं। जाम का सबसे ज्यादा असर दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूली बच्चों, मरीजों और उनके तीमारदारों पर पड़ा। कई एंबुलेंस जाम में फंस गईं, जिनके सायरन लगातार बजते रहे, लेकिन उन्हें आगे निकलने का रास्ता नहीं मिल सका। इससे मरीजों की हालत को लेकर परिजनों में भारी चिंता देखी गई।स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीजीआई गेट के सामने दवा मार्केट के पास अवैध रूप से खड़े डग्गामार वाहन, ऑटो और ई-रिक्शा जाम की सबसे बड़ी वजह बने। यही वाहन सड़क पर सवारी भरने के लिए खड़े रहते हैं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है। बताया गया कि इन अवैध वाहनों के कारण करीब दो किलोमीटर लंबा जाम कई घंटों तक बना रहा।रायबरेली रोड पर आवागमन लगभग ठप हो गया। ट्रक, बस, कार और दोपहिया वाहन जहां-तहां फंसे रहे। जाम में फंसे राहगीरों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि यह समस्या अब स्थायी रूप ले चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।कई लोगों ने मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस कर्मियों से जाम खुलवाने की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि उनकी एक नहीं सुनी गई। वहीं पीजीआई कोतवाली में मौजूद जिम्मेदारों से भी शिकायत की गई, इसके बावजूद व्यवस्था सुधरती नजर नहीं आई।स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि पीजीआई गेट के आसपास अवैध वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती हो और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में मरीजों, स्कूली बच्चों और आम जनता को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
