सात बार मिली असफलता, फिर भी नहीं मानी हार…..
मोहनलालगंज के सौरभ बने आईएफएस अधिकारी……
मोहनलालगंज। लखनऊ,कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य पर नजर हो, तो सात समंदर पार की सफलता भी कदम चूमती है। मोहनलालगंज तहसील के खुजेहटा मजरा बेलहिया खेड़ा गांव के लाल सौरभ सिंह ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। यूपीएससी आईएफएस परीक्षा 2026 के आए रिजल्ट में देशभर में 67वीं रैंक हासिल कर सौरभ ने न केवल अपने पिता का सपना पूरा किया, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
पिता का सपना, बेटे का संकल्प…..
सौरभ के पिता वीरेंद्र कुमार सेना के आर्मी मेडिकल कोर एएमसी में हवलदार के पद से 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे। वर्दी का मान समझने वाले वीरेंद्र कुमार का सपना था कि उनका बेटा देश सेवा में अधिकारी बने। मां गीता देवी गृहिणी ने भी बेटे की राह सुगम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सौरभ ने भी पिता के इस सपने को अपना संकल्प बना लिया।
संघर्ष की लंबी डगर,4 बार इंटरव्यू तक पहुँचे……
सफलता की यह राह आसान नहीं थी। सौरभ ने साल 2018 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी। इसके बाद 2019 और 2020 में भी उन्होंने निरंतर मेहनत की। वह चार बार इंटरव्यू की दहलीज तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। सातवें प्रयास तक आते-आते धैर्य की परीक्षा शुरू हो गई थी। साल 2021 में उनका चयन डिप्टी जेलर के पद पर हुआ, जिसे उन्होंने ज्वाइन कर लिया।
ड्यूटी के साथ जारी रखी ‘तपस्या’……
डिप्टी जेलर की नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच भी सौरभ के अंदर का छात्र कभी सोया नहीं। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रखी और अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। साल 2025 की आईएफएस परीक्षा में वह पूरे आत्मविश्वास के साथ बैठे और जब साल 2026 में परिणाम आया, तो उनकी मेहनत 67वीं रैंक के रूप में चमक उठी।
गांव में जश्न, पूर्वजों का आशीर्वाद…….
इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सूचना मिलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। चाचा हरिहर, शमशेर और राम किशोर ने ग्रामीणों का मुंह मीठा कराकर जश्न मनाया। भावुक पिता वीरेंद्र कुमार ने इस सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय पिता राम भरोसे के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरे परिवार की तपस्या का फल है। पूरे परिवार ने इस पल को एक उत्सव की तरह मनाया।
