मोहनलालगंज। नगराम क्षेत्र के बहरौली स्थित जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज में शुक्रवार को विद्यालय के संस्थापक शिक्षकों में शामिल रहे सेवानिवृत्त शिक्षक स्व. बाबूलाल वर्मा निवासी ददुरी के निधन पर शोक सभा आयोजित की गई। उनके निधन की खबर से विद्यालय परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने दिवंगत शिक्षक को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शिक्षा क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद किया।जानकारी के मुताबिक स्व. बाबूलाल वर्मा को कुछ समय पूर्व ब्रेन हेमरेज हुआ था। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक उनका उपचार चला। उपचार के दौरान 10 सितंबर 2026 को उनका निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही विद्यालय परिवार में शोक व्याप्त हो गया।शोक सभा में विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार वर्मा ने स्व. बाबूलाल वर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह बेहद मृदुभाषी, शांत स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे। विद्यार्थियों के प्रति उनका व्यवहार सदैव आत्मीय रहा। उन्होंने विद्यालय में विज्ञान, कृषि और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों का आवश्यकता के अनुसार कुशलतापूर्वक अध्यापन कराया। इसके साथ ही उन्होंने कुछ समय तक विद्यालय के प्रधानाचार्य पद का दायित्व संभालते हुए संस्थान के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
34 वर्षों तक दी विद्यालय को सेवाएं…….
विद्यालय परिवार के अनुसार स्व. बाबूलाल वर्मा का विद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा। वर्ष 1954 में जूनियर हाईस्कूल के रूप में स्थापित जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज बहरौली वर्ष 1969 में हाईस्कूल बना। स्व. बाबूलाल वर्मा विद्यालय के शुरुआती शिक्षकों में शामिल रहे। उन्होंने करीब 34 वर्षों तक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ शिक्षण कार्य किया और वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त हुए।शोक सभा के दौरान विद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारियों ने कहा कि स्व. वर्मा का सरल व्यवहार, अनुशासन और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने अपने सेवाकाल में कई पीढ़ियों के विद्यार्थियों को शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाई।इस दौरान विद्यालय परिवार ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा और ईश्वर से प्रार्थना की कि शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। शोक सभा में विद्यालय के समस्त शिक्षक, कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
