2002 में फर्जी दस्तावेजों से मृतक दर्शाने का आरोप, 2013 में बैनामे ने खोला बड़ा सवाल; सभी दस्तावेज शिकायतकर्ता के पास, पुलिस जांच शुरू———
मोहनलालगंज, लखनऊ।सरकारी अभिलेखों में किसी व्यक्ति को मृत दर्शाकर उसके बेटे को मृतक आश्रित के रूप में नौकरी दिलाने और उसकी पत्नी को पेंशन दिलाए जाने के आरोप ने अब नया मोड़ ले लिया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस व्यक्ति को 28 जून 2002 को मृत दर्शाया गया, उसी व्यक्ति के नाम वर्ष 2013 में जमीन का बैनामा कराया गया। मामले से जुड़े नियुक्ति संबंधी दस्तावेज, विभागीय आदेश और बैनामे की प्रतियां शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है।शिकायतकर्ता ललितेश सिंह के मुताबिक, उन्नाव जनपद के हिलौली क्षेत्र में बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक श्रीराम यादव को कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर मृत घोषित किया गया। आरोप है कि इसके बाद उनके पुत्र को मृतक आश्रित के रूप में सरकारी नौकरी दिलाई गई और उनकी पत्नी को मृतक कर्मचारी की पत्नी के रूप में पेंशन का लाभ मिलने लगा।
2013 में सामने आया सबसे बड़ा सवाल——-
शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले में सबसे बड़ा सवाल वर्ष 2013 के जमीन के बैनामे को लेकर है। आरोप है कि श्रीराम यादव को वर्ष 2002 में मृत दिखाए जाने के करीब 11 वर्ष बाद उनके नाम जमीन का बैनामा कराया गया।शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि सरकारी अभिलेखों में संबंधित व्यक्ति वर्ष 2002 में मृत था तो वर्ष 2013 में उसके नाम जमीन का बैनामा किस आधार पर हुआ? बैनामा दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का श्रीराम यादव की मूल सेवा पुस्तिका से मिलान कराया जाए तो मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।
नियुक्ति के फर्जी दस्तावेज भी शिकायत कर्ता के पास उपलब्ध—
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि मृतक आश्रित के रूप में नौकरी दिलाने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की प्रतियां उसके पास उपलब्ध हैं। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उन्नाव द्वारा जारी 30 जनवरी 2004 के मृतक आश्रित नियुक्ति आदेश की प्रति भी उपलब्ध होने की बात कही गई है।इस आदेश में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी द्वारा आवश्यक प्रमाणपत्र एवं अभिलेख प्रस्तुत किए जाने की शर्तें दर्ज हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि नियुक्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से तथ्यों को छिपाया गया अथवा गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए तो नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त की जा सकती है।ऐसे में जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि मृतक आश्रित नियुक्ति के समय कौन-कौन से दस्तावेज विभाग के समक्ष लगाए गए थे, उनमें मृतक कर्मचारी से संबंधित क्या जानकारी दर्ज थी और बाद के जमीन के बैनामे से उनका क्या संबंध है।
आरटीआई से भी मांगी गई जानकारी—-
शिकायतकर्ता ने उन्नाव के विकासखंड हिलौली के खंड शिक्षा अधिकारी से आरटीआई के तहत संबंधित प्रकरण की जानकारी मांगी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, पत्रांक संख्या 581/82 दिनांक 14 अगस्त 2026 के माध्यम से खंड शिक्षा अधिकारी ने लिखित जानकारी उपलब्ध कराई है।
उप मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद पुलिस जांच——-
शिकायतकर्ता के मुताबिक, मामले को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संज्ञान में लेते हुए पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को भेजा। डीजीपी के निर्देश पर पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया। कमिश्नर के निर्देशन में मामले की जांच मोहनलालगंज कोतवाली के हल्का दरोगा सौरभ सिंह को सौंपी गई है।जांच अधिकारी द्वारा शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। मामले में सेवा पुस्तिका, मृतक आश्रित नियुक्ति से जुड़े अभिलेख, पेंशन संबंधी दस्तावेज और वर्ष 2013 के बैनामे की जांच अहम मानी जा रही है।वही एसीपी मोहनलालगंज राजेश सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के उपरांत उच्चाधिकारियों के निर्देशन में आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वर्ष 2002 में मृत घोषित किए गए व्यक्ति के नाम वर्ष 2013 में जमीन का बैनामा कैसे हुआ और मृतक आश्रित नियुक्ति व पेंशन से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों की वास्तविकता क्या है। जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
