
जिम्मेदारों द्वारा बंदरों को भगाने के लिए नहीं की जा रही कोई व्यवस्था,ग्रामीणों में नाराजगी
सरेनी के दर्जनों गांवों में व्याप्त है बंदरों का उत्पात
टी के शुक्ला
सरेनी(रायबरेली)।विकास खंड़ सरेनी के कई गांवों में काले व लाल प्रजाति वाले बंदरों का आतंक बढ़ गया है।बंदर घरों में घुसकर खाने का सामान उठा ले जाने के साथ ही खेतों में बोई गई सब्जियों को नष्ट कर दे रहे हैं।बंदरों के आतंक के चलते किसानों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।इससे कई किसानों ने सब्जी उगाना छोड़ दिया है।ग्रामीण अंचल में बंदरों के आतंक से ग्रामीण व किसान बेहद परेशान हैं।खासकर सब्जी उत्पादक किसानों को बंदर सर्वाधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।खेत और बाड़ियों में सब्जी-भाजियों की फसल को चट कर जाते हैं।इसके अलावा ग्रामीणों के घरों के बाहर व छत पर रखे सामानों को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं,साथ ही टीनशेड को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।जिम्मेदारों द्वारा बंदरों को भगाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है,जिससे ग्रामीणों में जिम्मेदारों के प्रति गहरी नाराजगी है।सरेनी क्षेत्र के ग्राम भोजपुर,टेरुई, सोमवंशी खेड़ा,मोहनपुर,विशायकपुर,
तिवारीपुर,राजापुर,गहरौली, हरीपुर,दलीपुर,डूंड़ी,काल्हीगांव,पसनखेड़ा आदि गांवों में बंदरों का बहुत ज्यादा आतंक है।खेत और बाड़ियों में सब्जी-भाजी की फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ ही टीनशेड़ मकानों में कूद-कूदकर जर्जर करते हैं।इससे ग्रामीणों को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है।ग्रामीण एकजुट होकर बंदर को भगाने के लिए अभियान भी चलाते हैं।महज कुछ दिन तक बंदरों के आतंक से राहत तो मिलती है,लेकिन चंद दिनों में ही फिर बंदरों का आतंक शुरु हो जाता है।सब्जी-भाजी की फसल पर आक्रमण करते हैं।जिससे किसानों को परेशानी होती है।बंदरों के आतंक से परेशान होकर सब्जी उत्पादक किसान खेतों और बाड़ियों में सब्जी-भाजी की फसल लेना छोड़ रहे हैं।इससे आम आदमी को लोकल सब्जी नहीं मिल पा रही है और फार्म हाउसों से हरी सब्जी की सप्लाई होने से महंगाई आसमान छू रही है।क्षेत्र में बंदरों के आतंक से ग्रामीणों में दहशत है।बंदर दौड़ाकर लोगों को काट रहे हैं।लोगों पर हमला करने के साथ ही बंदर घरों में रखी खाने पीने की चीजों को भी अपना निशाना बना रहे हैं।कीमती चीजों को बंदर घरों से उठाकर ले जाते हैं।बंदरों के आतंक से भयभीत महिलाओं को खाना बनाते समय डंडा लेकर बैठना पड़ता है।बंदरों से बचने के लिए पहरा परिजन देते हैं।बंदरों का डर इतना है कि छतों पर जाने वाले जीना के दरवाजे तक में ताला लगा दिया गया है।ताकि बच्चे छत पर न जाएं।बंदरों के भय से स्कूल आने-जाने वाले छात्र और बाहर खेलने वाले बच्चे घरों से निकलने में कतराने लगे हैं।महिलाओं ने भी घरेलू कार्यों से छतों पर जाना बंद कर दिया है।परेशान ग्रामीण अब पहरेदारी करने को मजबूर हैं।अगर कोई महिला छत पर जाती है तो उसके साथ एक-दो लोग और जाते हैं,ताकि सुरक्षा बनी रहे।
छतों पर व्यापक इंतजाम के बाद भी नहीं राहत
ग्रामीण अंचल में ज्यादातर सब्जी उत्पादक किसान रहते हैं। ऐसे किसान बंदरों के आतंक से हर समय परेशान रहते हैं।दिन में बंदर कभी भी खेतों पर फसल को और मकान के छतों पर घरेलू सामानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।गांव के लोगों ने सामान को बंदरों से बचाने के लिए छतों पर कांटा तार भी लगाया है।इसके बाद भी बंदर नुकसान करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
कुत्तों से भी नहीं डर रहे हैं बंदर
ग्रामीण अंचल में बंदरों का आतंक इस कदर हावी हो गया है कि वे कुत्तों पर भी झपट पड़ते हैं।कुत्तों पर कई बार बंदरों ने हमला कर दिया है।अब भय के कारण ही कुत्ते बंदरों के नजदीक नहीं जाते।कुछ साल पहले तक बंदरों को भगाने के लिए किसान कुत्ते पाल रहे थे।अब कुत्ते भी बंदरों को नहीं भगा पा रहे हैं।
पौधा उखाड़कर ले जाते हैं बंदर
ग्रामीण अनूप अंकित तिवारी ने कहा कि सब्जी की फसल में फल लगने से पहले ही बंदर पौधा उखाड़कर ले जाते हैं।इस बार मिर्च,टमाटर और भाटा के पौधों को बंदरों ने बर्बाद कर दिया।सब्जी फसल को बचाने के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर भगाने का प्रयास भी किया।लेकिन एक दो दिन बाद बंदरों का आतंक फिर से शुरू हो जाता है।
फसल को चट कर जाते हैं बंदर
किसान दिनेश तिवारी,भोलू सिंह का कहना है कि बंदरों के आतंक से सभी लोग परेशान रहते हैं।कांटा तारों से घिरे खेतों पर रबी सीजन में सब्जी-भाजी की फसल लेते हैं।यहां मवेशी तो नहीं पहुंच पाते,लेकिन बंदर फसल को चट कर जाते हैं,जिससे किसानों को नुकसान होता है।ग्रामीण बंदर की समस्या से मुक्ति पाने के लिए हरसंभव प्रयास कर चुके,लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है।
करनी पड़ती है सब्जी फसल की रखवाली
ग्रामीण रीशू मिश्रा,शुभम सिंह का कहना है कि बंदर से परेशान होकर सब्जी-भाजी की फसल लेना ही छोड़ दिए हैं।सब्जियों को खाने के चक्कर में बंदर बाड़ी और घरों में प्रवेश कर टीनशेड़ सहित अन्य सामानों को क्षति पहुंचाते हैं।बंदरों के आक्रमण के कारण सब्जी की खेती करने पर दिन भर रखवाली करना पड़ता है,जिससे परेशानी होती है।