निगोहा, लखनऊ। फागुन का महीना आते ही ग्रामीण इलाकों में प्रकृति ने जैसे अपना पूरा श्रृंगार कर लिया है। पतझड़ की उदासी अब पीछे छूट चुकी है और चारों ओर सरसों के पीले फूलों की चादर बिछ गई है। खेतों में लहलहाती गेहूं की हरी-भरी बालियां हवा के झोंकों के साथ झूमती नजर आ रही हैं, जो मन को सुकून देने के साथ नई ऊर्जा का संचार कर रही हैं।ग्रामीण अंचलों में इन दिनों का दृश्य किसी त्योहार से कम नहीं है। खेतों में खिले सरसों के फूल जहां वातावरण को रंगों और खुशबू से सराबोर कर रहे हैं, वहीं गेहूं की हरियाली किसानों के चेहरे पर उम्मीद और खुशी की चमक ला रही है। किसान और मजदूर भी इस मौसम में दोगुने उत्साह के साथ खेतों में काम करते दिखाई दे रहे हैं।फागुन की दस्तक के साथ ही होली पर्व की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। गांवों में अब धीरे-धीरे उत्सव का माहौल बनने लगा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के मन में उमंग और उल्लास दिखाई दे रहा है।
यह मौसम सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में नई उम्मीद का संदेश भी देता है। सरसों के पीले फूल और गेहूं की हरियाली मानो यह कह रही है कि हर पतझड़ के बाद नई बहार जरूर आती है।ग्रामीण क्षेत्रों में फागुन की यह बहार खुशियों के रंग बिखेर रही है और हर दिल में उत्सव की दस्तक साफ महसूस की जा रही है।
