.. लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार भले ही प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। निगोहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में व्याप्त अव्यवस्थाएं मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करती दिखाई दे रही हैं।डॉक्टर नदारद, स्टाफ के भरोसे इलाज अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का आरोप है कि यहां डॉक्टरों की मौजूदगी नियमित नहीं रहती। इलाज कराने आए संदीप कुमार तिवारी ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिले और मौजूद महिला स्टाफ ने ही दवा देकर उन्हें वापस भेज दिया। वहीं अपने बच्चे मानस का इलाज कराने पहुंची गुड़िया ने भी यही पीड़ा जताई कि डॉक्टरों के अभाव में स्टाफ ही इलाज कर रहा है।अस्पताल की इमारत भी बदहाल स्थिति में है। छत से प्लास्टर गिरने की घटनाएं आम हैं, जिससे मरीजों और कर्मचारियों के सिर पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है।पीएचसी परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। मुख्य गेट पर कूड़े के ढेर और परिसर में पड़ी शराब की खाली बोतलें न सिर्फ सफाई व्यवस्था बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं।अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी है। वार्ड बॉय न होने के कारण दाई को ही घायलों की पट्टी करनी पड़ रही है। फूल दुलारी दाई ने बताया कि मजबूरी में उन्हें यह जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।शिकायत के बाद भी हालात जस के तसस्थानीय निवासी कृष्ण मुरारी शुक्ला ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि कई दिनों से इलाज के लिए आने के बावजूद डॉक्टर नहीं मिलते और उन्हें हर बार निराश होकर लौटना पड़ता है।इस पूरे मामले पर सीएचसी अधीक्षक दिवाकर का कहना है कि उन्हें इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर निगोहां पीएचसी की जमीनी हकीकत इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आम जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठना तय है।
