नगराम।इंदिरा नहर के किनारे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई किलोमीटर तक लोहे की रेलिंग और बैरिकेडिंग कराई गई है। बरसात के मौसम में नहर का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के बीच यह व्यवस्था राहगीरों व आसपास के ग्रामीणों के लिए सुरक्षा कवच का काम कर रही है। नहर की पटरी पर की गई बैरिकेडिंग से लोगों के सीधे नहर की ओर जाने का खतरा कम हुआ है। नगराम क्षेत्र के पटवा खेड़ा के पास करीब सात वर्ष पहले वर्ष 2019 में एक दर्दनाक हादसा हुआ था ,अनियंत्रित पिकअप डाला इंदिरा नहर में जा गिरा था। हादसे में छह मासूम बच्चों की जान चली गई थी। हादसे के बाद पांच बच्चों के शव बरामद कर लिए गए थे, जबकि एक बच्चे का शव आज तक नहीं मिल सका है। उस समय नहर की ओर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण हादसा और भी भयावह हो गया था। इस घटना के बाद नहर किनारे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। बरसात के दौरान नहर में पानी बढ़ने पर आसपास के लोगों और राहगीरों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में नहर की पटरी पर कई किलोमीटर तक लोहे की रेलिंग लगाए जाने से सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है। रेलिंग नहर और सड़क के बीच एक अवरोध के रूप में काम कर रही है, जिससे अनजाने में लोगों के नहर की ओर चले जाने की आशंका कम हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बरसात में नहर का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी का बहाव भी तेज हो जाता है। कई स्थानों पर पटरी से गुजरने वाले राहगीरों और ग्रामीणों को नहर के किनारे फिसलने या अनियंत्रित होकर पानी में गिरने का खतरा बना रहता था। बैरिकेडिंग होने से अब ऐसे हादसों की आशंका कम हुई है। ग्रामीणों ने सुरक्षा के इस इंतजाम को उपयोगी बताते हुए मांग की है कि नहर की पटरी पर लगी रेलिंग की नियमित निगरानी की जाए। कहीं बैरिकेडिंग क्षतिग्रस्त होने या हटने की स्थिति में उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाए। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी कराई जाए, ताकि रात के समय भी राहगीरों को नहर की सीमा स्पष्ट दिखाई दे। स्थानीय लोगों का कहना है कि सात वर्ष पुराने हादसे की दर्दनाक याद आज भी क्षेत्रवासियों के जेहन में है। ऐसे में नहर किनारे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना हादसों की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
