भवरेश्वर मंदिर के पास धरना देकर उठाई नदी की स्वच्छता की मांग, प्रशासन से जांच और कार्रवाई की अपील……
मोहनलालगंज, लखनऊ। मोहनलालगंज क्षेत्र से होकर गुजरने वाली प्राचीन सई नदी में गंदा पानी गिरने की शिकायत को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। भवरेश्वर मंदिर के पास सई नदी किनारे राजा गौ रक्षक और अंशुमान गौ रक्षक भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित विभागों से मामले की जांच कराकर नदी में प्रदूषित पानी के प्रवाह को रोकने की मांग की है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पीजीआई अस्पताल क्षेत्र से निकलने वाला पानी बांक नाले के माध्यम से मोहनलालगंज क्षेत्र से होते हुए सई नदी तक पहुंच रहा है। उनका दावा है कि नाले में गंदा पानी आने के कारण नदी के पानी की स्वच्छता प्रभावित हो रही है। हालांकि, नदी में पहुंच रहे पानी की वास्तविक स्थिति और उसके स्रोत की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।भवरेश्वर मंदिर से जुड़ी है श्रद्धालुओं की आस्था……..सई नदी का भवरेश्वर मंदिर क्षेत्र में धार्मिक महत्व है। यहां श्रद्धालु पूजा-पाठ के साथ नदी में स्नान भी करते हैं। ऐसे में नदी के पानी की स्वच्छता को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की चिंता सामने आ रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।भूख हड़ताल पर बैठे दोनों प्रदर्शनकारियों ने पुल के पास पोस्टर लगाकर नाले के पानी की जांच कराने, नदी में गंदे पानी का प्रवाह रोकने और नदी की सफाई कराने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर स्थिति की वास्तविकता सामने लाने की भी अपील की है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि शिकायत की जांच में नाले से नदी में प्रदूषित पानी पहुंचने की पुष्टि होती है तो संबंधित विभागों को इसका स्थायी समाधान करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और नाले को बंद करने का प्रयास किया जा सकता है।वहीं, पूरे मामले में नदी के पानी और नाले के पानी की वैज्ञानिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी का स्रोत क्या है और उसमें प्रदूषण का स्तर कितना है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर स्थिति की जांच करें।अब निगाहें संबंधित विभागों की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो सई नदी में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था किए जाने की जरूरत होगी।
