
एक दिन पहले ही उनकी पत्नी बीना पांडेय का भी हुआ था स्वर्गवास
शिवपुरी स्थित गंगा घाट पर किया गया अंतिम संस्कार
लालगंज(रायबरेली)।उत्तर प्रदेश सरकार में रहे पूर्व विधि एवं न्याय मंत्री गिरीश नारायण पांडेय का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया।एक दिन पहले ही उनकी पत्नी बीना पांडेय का भी स्वर्गवास हो गया था।उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।गिरीश नारायण पांडेय काफी समय से बीमार चल रहे थे।उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें गुरुवार को एसजीपीजीआई,लखनऊ में भर्ती कराया गया था।जहां शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।उनका पार्थिव शरीर उनके पान दरीबा स्थित आवास लाया गया,जहां सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।दोपहर बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई,जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।जगह-जगह पुष्प वर्षा कर लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।उनका अंतिम संस्कार उनके गांव शिवपुरी स्थित गंगा घाट पर किया गया।उनके लोकतंत्र सेनानी व पूर्व मंत्री होने के कारण पूरी यात्रा में एसडीएम मिथिलेश त्रिपाठी व सीओ अनिल सिंह कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला मौजूद रह।वह अपने पीछे तीन बेटों अनिंद्य पांडेय,अनूप पांडेय व अजय पांडेय का भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं।उनके निधन पर कई राजनीतिक,सामाजिक व्यापार और शैक्षणिक जगत की हस्तियों ने दुख व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि गिरीश नारायण पांडेय दो बार सरेनी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रहे व कल्याण सिंह की सरकार में गिरीश नारायण पांडेय को विधि एवं न्याय मंत्री का पद मिला।गिरीश नारायण पांडेय पुराने संघ के कार्यकर्ता थे।1971 में इंदिरा गांधी रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ी तो उनके सामने राज नारायण चुनाव लड़े थे।इंदिरा गांधी चुनाव जीत गई लेकिन विपक्ष ने दबाव बनाया और आरोप लगाया कि धन और राजनीतिक षड्यंत्र से इंदिरा गांधी ने चुनाव जीता,चुनाव परिणाम को लेकर मामला कोर्ट में चला गया और उसमें मुख्य गवाह के रूप में संघ कार्यकर्ता गिरीश नारायण पांडेय थे।कोर्ट ने सुनवाई के बाद चुनाव को रद्द कर दिया और इसके बाद फिर नाराज इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लागू कर दी।इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस के इशारे पर गिरीश नारायण पांडेय को जेल में भी भेजा गया था।गिरीश नारायण पांडेय पर कई बार कांग्रेस ने दबाव बनाकर पार्टी में शामिल करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने से साफ मना कर दिया था और बराबर कांग्रेस के खिलाफ ही रहे।पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी जी के नजदीकी माने जाते थे।गंगा घाट पर गार्ड़़ आफ ऑनर के बाद अंतिम संस्कार किया गया।वहीं लोगों की मांग है कि गिरीश नारायण पांडेय जी ने संघ और बीजेपी को मजबूत करने के लिए पूरे जीवन अंतिम सांस तक काम किया है।ऐसे में उनके नाम से उनके पैतृक गांव गेगासों और लालगंज कस्बे में स्मृति द्वार बनाया जाए।वहीं श्रद्धांजलि देने पहुंचे राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि गिरीश नारायण पांडेय जी के निधन से पार्टी को निश्चित रूप से क्षति पहुंची है,क्योंकि वह रायबरेली में भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं के गार्जियन (मुखिया) के रूप में थे।शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर सिंह,अशोक कुमार सिंह,धीरेंद्र बहादुर सिंह,अशोक सिंह रामपुरी,सपा विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह,भाजपा नेता राजेश निर्मल,पशुपतिशंकर बाजपेई,विद्यासागर अग्निहोत्री,पूर्व शिक्षक शिवभूषण द्विवेदी,शैलेन्द्र अग्निहोत्री,प्रभात सिंह त्रिलोकचंदी,अजय प्रताप सिंह उर्फ रोहित,शीलू सिंह,सुबोध कुमार बाजपेई,देश दीपक सोनी,महेन्द्र पांड़ेय,भाजपा नेता कैलाश बाजपेई,चंद्र प्रकाश पांडेय,बैसवारा एजुकेशन ट्रस्ट के प्रबंधक देवेंद्र बहादुर सिंह,प्राचार्य प्रो. शीला श्रीवास्तव,नगर पंचायत अध्यक्ष सरिता दीपेंद्र गुप्ता,सतीश त्रिवेदी,राजू तिवारी,रामबाबू गुप्ता,केसी गुप्ता,दीपचंद्र गुप्ता,कैलाश गुप्ता,सराफा व्यवसाई दिनेश गुप्ता,अजय वर्मा,मनोज अवस्थी,कांग्रेसी नेता महेश प्रसाद शर्मा,व्यापारी नेता विवेक शर्मा,राहुल भदौरिया,लाला सोनी,निशांत पांडेय,इंद्रेश सिंह,राणा गुप्ता सहित तमाम गणमान्य लोग शामिल रहे।