अपनी बेलगाम कार्यशैली को लेकर काफी विवादों से घिरे शिवशंकर सिंह के तबादले के बाद शिवाकांत पांड़ेय को मिली कोतवाली की कमान
नवागत कोतवाल शिवाकांत पांड़ेय के लिए किसी कांटो भरे ताज से कम नहीं होगी सरेनी कोतवाली
पूरे कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री की मंशा को दरकिनार करते हुए चलती रही स्थानांतरित कोतवाली प्रभारी की हिटलर शाही
सरेनी(रायबरेली)।अपनी बेलगाम कार्यशैली को लेकर काफी विवादों से घिरे रहे कोतवाल शिवशंकर सिंह के कोतवाली सरेनी में करीब एक वर्ष के कार्यकाल के बाद आखिरकार मंगलवार को कोतवाली से विदाई हुई,जिससे क्षेत्र के तमाम पीड़ित एवं सम्मानित,संभ्रांत लोगों को उनके आतंक से निजात मिलने के साथ ही हर्ष का माहौल दिखाई पड़ रहा है।वहीं शिवशंकर सिंह के सलोन तबादले के बाद कोतवाली डीह में तैनात रहे शिवाकांत पांड़ेय को सरेनी कोतवाली की कमान सौंपी गई है।जिन्होंने मंगलवार को पदभार ग्रहण कर लिया है।लेकिन मौजूदा हालात यह हैं कि नवागत कोतवाल शिवाकांत पांड़ेय के लिए यह कोतवाली किसी कांटो भरे ताज से कम नहीं होगी।पिछले एक वर्ष के कार्यकाल पर नजर डालें तो कोतवाली क्षेत्र में जहां एक तरफ चोरी,मारपीट,छेड़छाड़,दबंगई,
अवैध कटान,जुआं,अवैध शराब बिक्री व गरीबों का पुलिसिया उत्पीड़न आदि होने की गंभीर घटनाओं ने कोतवाली क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान उठाए,वहीं क्षेत्र में पुलिस और खनन विभाग के अवैध संरक्षण में फलफूल रहे अवैध मिट्टी खनन व वन माफियाओं से सांठगांठ कर अंधाधुंध हरे पेड़ों की कटान के कारोबार ने भी लगातार सुर्खियां बटोरीं।सूत्रों की मानें तो क्षेत्र में जहां एक तरफ विवादित जमीनों पर पुलिसिया सेटिंग गेटिंग के चलते उस पर अवैध कब्जा व प्लाटिंग का कारोबार करने वाले लोग खुलकर अपना काम करते नजर आए,वहीं दबंगई के बल पर गरीब,असहायों की जमीन पर खुलेआम अवैध कब्जा करने वाले लोग भी नंगा नाच करते रहे।कोतवाली क्षेत्र में आपराधिक गंभीर घटनाएं काफी बढ़ जाने और तत्कालीन कोतवाल के द्वारा उक्त घटनाओं पर अंकुश लगाने व खुलासा करने में असफल साबित होने से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ था।जिसकी खबरों को कुछ निर्भीक पत्रकारों द्वारा निष्पक्ष रूप से प्रमुखता से विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जा रहा था।मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद सरेनी कोतवाली क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन खुलेआम होता रहा और स्थानीय पुलिस प्रशासन के जिम्मेदार लोग खनन माफियाओं से प्रतिदिन व रात के हिसाब से निश्चित चढ़ावे की धनराशि मिलने से मूकदर्शक बने रहे।इस सब के बावजूद सत्ता पक्ष के एक माननीय का संरक्षण प्राप्त होने के साथ ही विभाग के ही एक उच्चाधिकारी के विशेष कृपा पात्र व कमाऊ पूत माने जाने वाले कोतवाल शिवशंकर सिंह चंद चाटुकार दलालों के सहारे पूरी व्यवस्था को एक वर्ष तक चलाते रहे और अंततः एक मलाईदार कोतवाली से हटाकर उन्हें दूसरी मलाईदार कोतवाली की कुर्सी थमा दी गई।पूरे कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री की मंशा को दरकिनार करते हुए कोतवाली प्रभारी की हिटलर शाही चलती रही।इन हालातों में नवागत कोतवाल शिवाकांत पांड़ेय के लिए कोतवाली क्षेत्र में चोरी,छिनैती,छेड़छाड़,अवैध मिट्टी खनन,अवैध कटान आदि होने की गंभीर घटनाओं व पुलिसिया उत्पीड़न पर रोक लगाने के साथ-साथ लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करने की बहुत बड़ी चुनौती होगी।अब वह इसमें कितना सफल हो पाते हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
