ट्रक की टक्कर में बाल-बाल बचे बाइक सवार को थाने में बैठाने का आरोप, विभागीय कार्रवाई की मांग…..
मोहनलालगंज। लखनऊ।मोहनलालगंज कोतवाली क्षेत्र में रविवार सुबह एक सड़क हादसे के बाद उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब पीड़ित बाइक सवार को ही पुलिस द्वारा आरोपी की तरह थाने ले जाने का आरोप सामने आया। घटना गौरा मोड़ के पास की है, जहां तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से बाइक सवार बाल-बाल बच गया, लेकिन पुलिस कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।
जानकारी के अनुसार, गौरा निवासी जय प्रकाश जायसवाल रविवार सुबह करीब नौ बजे अपनी बाइक से मोहनलालगंज की ओर आ रहे थे। जैसे ही वह गौरा मोड़ के पास पहुंचे, तभी रायबरेली की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, हालांकि सौभाग्य से जय प्रकाश को गंभीर चोट नहीं आई।
हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से भागने लगा। उसकी लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैये को देख आसपास मौजूद ग्रामीणों और राहगीरों ने उसका पीछा कर पकड़ लिया। ग्रामीणों ने घायल बाइक सवार को सड़क किनारे बैठाकर प्राथमिक सहारा दिया। इस दौरान ट्रक चालक ने ग्रामीणों से अभद्रता की, जिससे नाराज होकर कुछ लोगों ने उसकी पिटाई भी कर दी।सूचना मिलने पर गौरा चौकी से दरोगा सौरभ सिंह मौके पर पहुंचे, लेकिन यहां स्थिति और बिगड़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी प्राथमिक जांच के दरोगा ने ट्रक चालक के बजाय पीड़ित जय प्रकाश को ही दोषी मानते हुए अपनी गाड़ी में बैठा लिया और मोहनलालगंज कोतवाली ले आए। आरोप है कि थाने में पीड़ित का मोबाइल जब्त कर लिया गया और जूते उतरवाकर उसे अंदर बैठा दिया गया, जिससे ग्रामीणों में रोष फैल गया।घटना की जानकारी मिलने पर मोहनलालगंज इंस्पेक्टर ब्रजेश त्रिपाठी ने मामले की जांच की। जांच में जय प्रकाश को पूरी तरह पीड़ित पाए जाने पर इंस्पेक्टर स्वयं थाने पहुंचे, पीड़ित से बातचीत कर उसका हालचाल जाना और पूछा कि वह ट्रक चालक के खिलाफ क्या कार्रवाई चाहता है।पीड़ित जय प्रकाश ने बताया कि ट्रक चालक द्वारा माफी मांगे जाने पर वह सुलह के लिए तैयार है और उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहता। हालांकि, दरोगा सौरभ सिंह के कथित मनमाने व्यवहार और गलत कार्रवाई से आहत जय प्रकाश ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है।इस पूरे मामले में इंस्पेक्टर ब्रजेश त्रिपाठी ने कहा कि यदि पीड़ित की ओर से तहरीर दी जाती है तो ट्रक चालक के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दरोगा के व्यवहार से संबंधित रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।घटना के बाद से क्षेत्र के ग्रामीणों में दरोगा के रवैये को लेकर गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही पीड़ित के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करेंगे, तो आम जनता को न्याय की उम्मीद कैसे होगी।
