लखनऊ।निगोहां गांव में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में रविवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा में काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य श्री नरेन्द्रानंद जी महाराज की पावन उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया। कथा व्यास एवं कुंडली विशेषज्ञ आचार्य दुर्गेश अवस्थी ने भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।कथा के दौरान आचार्य दुर्गेश अवस्थी ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से लेकर उनके जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कंस वध, माखन चोरी लीला, महारास, भगवान श्रीकृष्ण के यज्ञोपवीत संस्कार, गुरु आश्रम गमन, द्वारिकापुरी के निर्माण तथा द्वारिकाधीश बनने तक की लीलाओं का भावपूर्ण चित्रण किया। इसके साथ ही उन्होंने रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भी सुंदर और प्रेरणादायक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए।कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण का अवतार अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। जब-जब संसार में अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में सत्य, प्रेम और कर्तव्य को अपनाने की प्रेरणा दी।कथा के दौरान पूरे पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर कथा का रसपान करते रहे।इस अवसर पर कथा के यजमान कृष्ण प्रकाश शुक्ला एवं हरिप्रकाश शुक्ल ने विधि-विधान के साथ गौदान किया। गौ माता को सोने की चेन और चांदी की पायल पहनाकर उनका श्रृंगार किया गया और श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी गौ माता की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।कथा स्थल पर क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने बड़ी संख्या में कथा में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति और आस्था का वातावरण बना रहा।
