मोहनलालगंज।लखनऊ,मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जरूरतमंदों के लिए एक सहारा मानी जाती है, अब गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े के आरोपों में घिरती नजर आ रही है। ताजा मामला मोहनलालगंज क्षेत्र का है, जहां बड़े पैमाने पर अपात्र जोड़ों द्वारा योजना का लाभ लेने की कोशिश सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं।जानकारी के अनुसार, 23 फरवरी को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में कुल 95 जोड़ों ने विवाह संपन्न किया था। इस आयोजन के लिए करीब 300 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन प्रारंभिक जांच में ही लगभग 200 आवेदन अपात्र पाए गए। अधिकारियों की मानें तो इनमें अधिकांश जोड़े पहले से शादीशुदा थे, जो सरकारी अनुदान पाने के लालच में दोबारा विवाह का प्रयास कर रहे थे।जांच के दौरान कई चौंकाने वाले मामले भी सामने आए। एक जोड़ा तो झूठे दस्तावेजों के आधार पर मंडप तक पहुंच गया, लेकिन लड़की की पहचान को लेकर संदेह होने पर अधिकारियों ने तत्काल उसे सूची से बाहर कर वापस भेज दिया। वहीं, एक अन्य मामले में मंदिर में पहले से शादी की तस्वीरें सामने आने पर जोड़े की सच्चाई उजागर हो गई और उनका नाम निरस्त कर दिया गया।इसके अलावा 12 मार्च को मलिहाबाद में प्रस्तावित सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए मोहनलालगंज से भेजे गए 25 आवेदनों में से भी चार जोड़े अपात्र पाए गए। जांच में उनके पहले से विवाहित होने की पुष्टि हुई। इस दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अपात्र जोड़ों के पक्ष में राजनीतिक सिफारिशें भी की गईं, हालांकि अधिकारियों ने ऐसे मामलों में सख्ती दिखाते हुए उन्हें सूची से बाहर कर दिया।सबसे गंभीर बात यह है कि झूठे शपथ पत्र देकर आवेदन करने वाले लोगों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे फर्जीवाड़ा करने वालों के हौसले बुलंद हैं और योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।ब्लॉक स्तर के अधिकारियों का कहना है कि सभी पंचायत सचिवों को आवेदनों की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। समाज कल्याण विभाग और पंचायत विभाग की निष्क्रियता के चलते यह खेल लगातार बढ़ता जा रहा है।स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और वास्तव में जरूरतमंदों को ही योजना का लाभ मिल सके।
