हरिप्रसाद की मौत के गम के बीच पत्नी श्यामवती ने दिया पुत्री को जन्म, जन्म से एक दिन पहले ही उठ गया मासूम के सिर से पिता का साया——-
मोहनलालगंज, लखनऊ।मोहनलालगंज के सिसेंडी क्षेत्र के जबरेला में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान सई नदी में डूबकर हुई हरिप्रसाद की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जिस घर में गणेश विसर्जन के बाद खुशियां लौटनी थीं, वहां मातम छा गया। सबसे मार्मिक स्थिति तब बनी, जब हरिप्रसाद की अंतिम यात्रा निकाले जाने के कुछ घंटे बाद ही उनकी गर्भवती पत्नी श्यामवती ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहनलालगंज में एक पुत्री को जन्म दिया।हरिप्रसाद की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ था। दोपहर में परिजन और ग्रामीण नम आंखों से उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और अंतिम संस्कार किया। इसी बीच अस्पताल में भर्ती श्यामवती प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। पति की मौत का दुख और आने वाली संतान की चिंता उनके लिए असहनीय पीड़ा का कारण बनी हुई थी।जानकारी के मुताबिक हरिप्रसाद की अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार के बाद उसी रात करीब 12 बजे श्यामवती ने एक पुत्री को जन्म दिया। एक ओर परिवार हरिप्रसाद को अंतिम विदाई दे रहा था, तो दूसरी ओर उसी परिवार में एक नन्ही जिंदगी दुनिया में दस्तक दे रही थी।नवजात बच्ची की किलकारी सुनकर परिजनों के चेहरे पर कुछ पल के लिए खुशी जरूर आई, लेकिन पिता को खोने का गम उससे कहीं भारी था। जन्म के महज एक दिन पहले ही मासूम बच्ची के सिर से पिता का साया उठ गया। मां श्यामवती भी पति की मौत के सदमे में हैं और नवजात बेटी की जिम्मेदारी अब उनके सामने है।
एक ही दिन उठी अर्थी और आई नन्ही जिंदगी——–
गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान जबरेला के पास सई नदी में हुए हादसे में तीन युवक डूब गए थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया। हादसे में हरिप्रसाद की जान चली गई। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया।रविवार की दोपहर जब हरिप्रसाद की अर्थी घर से उठी तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। किसी ने नहीं सोचा था कि उसी रात उनके घर से एक नवजात बेटी की किलकारी सुनाई देगी।
खुशी और गम के बीच जिंदगी की नई शुरुआत——
हरिप्रसाद के जाने का दुख परिवार के लिए कभी न भरने वाला जख्म है, लेकिन उनकी नवजात बेटी अब परिवार के लिए उनकी याद और उम्मीद का सहारा बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि मासूम बच्ची अपने पिता को देख भी नहीं सकी और दुनिया में आने से पहले ही उसने पिता को खो दिया।एक तरफ पिता की अर्थी उठी और दूसरी तरफ उसी रात बेटी की किलकारी गूंजी। सिसेंडी के जबरेला की यह घटना पूरे क्षेत्र को भावुक कर गई है। हरिप्रसाद की मौत से जहां परिवार में मातम है, वहीं नवजात बच्ची के जन्म ने गम के बीच जिंदगी की एक नई उम्मीद भी जगाई है।
