नगराम, लखनऊ। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विद्यालय परिसर को प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने के उद्देश्य से नगराम क्षेत्र के बहरौली स्थित जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज में ‘पेन बदलो, पर्यावरण बदलो’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अनूठी पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का एहसास कराया गया। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों ने अपने इस्तेमाल किए जा चुके पांच पुराने पेन जमा किए, जिसके बदले उन्हें एक नया पेन दिया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार वर्मा की पहल पर आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य परिसर में इधर-उधर फेंके जाने वाले प्लास्टिक के पेन से होने वाले कचरे को कम करना और बच्चों में स्वच्छता की आदत विकसित करना है। विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अक्सर पुराने और इस्तेमाल किए जा चुके पेन परिसर में ही फेंक देते थे। इससे विद्यालय में प्लास्टिक कचरा फैलने के साथ-साथ साफ-सफाई बनाए रखने में भी परेशानी होती थी। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रशासन ने पेन एकत्र करने और उनके बदले नए पेन देने की अभिनव पहल शुरू की।इस संबंध में प्रधानाचार्य अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक पेन को लापरवाही से इधर-उधर फेंकने के कारण विद्यालय परिसर में गंदगी फैलती थी। इसके अलावा जमीन पर पड़े पेन और उनकी नुकीली नोक से बच्चों के पैरों में चोट लगने की आशंका भी बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं है, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार, स्वच्छता की आदत और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।प्रधानाचार्य ने बताया कि ‘पेन बदलो, पर्यावरण बदलो’ अभियान के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। पुराने पेन को कूड़े में फेंकने के बजाय एकत्र करने से विद्यालय परिसर को साफ रखने में मदद मिलेगी और प्लास्टिक कचरे के उचित संग्रह की आदत भी विकसित होगी।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यदि बच्चे बचपन से ही कचरे को निर्धारित स्थान पर डालने, प्लास्टिक का अनावश्यक इस्तेमाल कम करने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने की आदत अपना लें, तो इसका सकारात्मक प्रभाव समाज पर भी पड़ेगा।कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने पुराने पेन जमा करने की इस पहल की सराहना की और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में सहयोग करने का संकल्प लिया। शिक्षकों ने भी बच्चों को प्लास्टिक कचरे से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय प्रशासन की इस पहल को बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। ‘पेन बदलो, पर्यावरण बदलो’ अभियान यह संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमेशा बड़े संसाधनों या व्यापक अभियानों की आवश्यकता नहीं होती। छोटे स्तर पर शुरू की गई सार्थक पहल भी लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
