
- शिवपुराण कथा के चौथे दिन शिव-पार्वती विवाह व तारकासुर वध प्रसंग का हुआ वर्णन
लखनऊ। निगोहां क्षेत्र के दखिना गांव में चल रही शिवपुराण कथा के चौथे दिन का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। कथा का वाचन प्रख्यात कथावाचक पंडित जय शंकर शुक्ला द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण शैली में शिवपुराण के प्रसंगों को प्रस्तुत किया।
कथा में बताया गया कि जैसे सूर्य और चंद्रमा के बिना संसार अंधकारमय हो जाता है, वैसे ही बिना शास्त्र और पुराणों के ज्ञान के मनुष्य का जीवन भी अज्ञानता से भर जाता है। पुराणों के अध्ययन से जीवन के उद्देश्य, धर्म और कर्तव्यों की स्पष्टता मिलती है। शास्त्र ही अज्ञान का नाश करते हैं और मनुष्य को पतन से बचाकर जीवन के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।पंडित जय शंकर शुक्ला ने शिवपुराण के प्रसिद्ध प्रसंगों की व्याख्या करते हुए भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह की दिव्य कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे यह विवाह ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक बना और शिवजी के जीवन में गृहस्थ धर्म का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही तारकासुर वध का उल्लेख करते हुए बताया गया कि कैसे शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने अधर्म के प्रतीक तारकासुर का अंत कर धर्म की पुनः स्थापना की।इस आध्यात्मिक आयोजन के संयोजक वरिष्ठ समाजसेवी अनमोल तिवारी हैं, जिन्होंने इस कथा के आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक समरसता को पुनः जागृत किया है। कथा के दौरान आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ कथा का श्रवण किया। भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और संतवाणी के बीच भक्तगण पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे रहे। आयोजन समिति ने बताया कि शिवपुराण कथा महोत्सव आगामी दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें अन्य पुराणिक और प्रेरणास्पद प्रसंगों की प्रस्तुति की जाएगी।