मोहनलालगंज। लखनऊ।राजधानी लखनऊ के विजय नगर स्थित मुख्य संरक्षक एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अजय दीप सिंह के आवास पर रविवार को योगासना स्पोर्ट्स फाउंडेशन ऑफ उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण कार्यकारिणी बैठक एवं सम्मान समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। “योगेन सह पारम्परिक क्रीड़ा” के ध्येय वाक्य के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में योगासन के साथ-साथ भारत की गौरवशाली पारंपरिक खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया गया।बैठक में आगामी वर्ष 2026 के खेल कैलेंडर पर विस्तार से चर्चा की गई। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि फाउंडेशन अब केवल योगासन तक सीमित न रहकर मल्लखंब, खो-खो, कबड्डी, गटका, दंगल, लाठी-कला और शूट बॉक्सिंग जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों के संरक्षण, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करेगा। वर्ष 2026 में इन खेलों को लेकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर की बड़ी प्रतियोगिताओं के आयोजन की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए पदाधिकारियों, प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य संरक्षक अजय दीप सिंह ने संगठन की गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाने पर मीडिया प्रभारी अवनीश पाण्डेय को अंगवस्त्र पहनाकर विशेष रूप से सम्मानित किया और उनके कार्यों की सराहना की।एसोसिएशन के अध्यक्ष यूसुफ बेग ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की असली पहचान योग और पारंपरिक खेलों में निहित है। संगठन का उद्देश्य इन विधाओं में छिपी प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उत्तर प्रदेश को खेल जगत में अग्रणी बनाना है।वहीं, जनरल सेक्रेटरी डॉ. महेश लाल एवं कोषाध्यक्ष आचार्य सुरेश कुमार ने वर्ष 2026 की प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि संगठन का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण अंचलों में छिपी प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ना है।बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि योगासना स्पोर्ट्स फाउंडेशन ऑफ उत्तर प्रदेश आने वाले समय में पारंपरिक भारतीय खेलों को नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।यह बैठक निश्चित रूप से प्रदेश में पारंपरिक खेलों के उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
