मोहनलालगंज, लखनऊ। केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना सीएलबी रोड योजना सहित अनेक विकास योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन मोहनलालगंज क्षेत्र के कुबहरा और कमालपुर विचलिका गांव के बीच स्थित मात्र चार सौ मीटर का रास्ता आज भी विकास की राह देख रहा है। वन विभाग के अधीन आने वाले इस मार्ग पर सड़क निर्माण की अनुमति न मिलने के कारण हजारों ग्रामीण वर्षों से बदहाल और जानलेवा रास्ते पर आवागमन करने को मजबूर हैं।ग्रामीणों के अनुसार आजादी के पचहत्तर वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस मार्ग की स्थिति नहीं सुधर सकी है। सड़क की जगह बड़े-बड़े गड्ढों से भरा कच्चा रास्ता है, जिस पर गर्मी के दिनों में धूल का गुबार उड़ता है तो बारिश में यह मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाता है। रास्ते के दोनों ओर गहरे नाले होने के कारण दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है।आस पास गांवों के लोगों का कहना है कि आए दिन राहगीर फिसलकर गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। कई बार दोपहिया और चारपहिया वाहन नालों में पलट चुके हैं, जिन्हें बाहर निकालने के लिए जेसीबी मशीन की मदद लेनी पड़ती है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह मार्ग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग समस्या के समाधान के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीण बताते हैं कि इस चार सौ मीटर के खराब रास्ते से बचने के लिए लोगों को करीब 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। स्कूल जाने वाले बच्चों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व समाजवादी पार्टी के सांसद आर.के.चौधरी ने सरकार को लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी। इसको लेकर दर्जनों समाचार पत्रों में यह खबर प्रकाशित हुई थी कि इस मार्ग के निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है और कार्य जल्द शुरू होगा। हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह अलग है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू होना तो दूर, एक इंच भी सड़क नहीं बनाई गई है।क्षेत्रवासियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार ज्ञापन देकर सड़क निर्माण की मांग की जा चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब महज चार सौ मीटर सड़क का निर्माण दशकों में नहीं हो पा रहा है, तब ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के दावे और “विकसित भारत” का सपना सवालों के घेरे में दिखाई देता है।अब क्षेत्र के लोगों की मांग है कि वन विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी आपसी समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द सड़क निर्माण की अनुमति प्रदान करें, ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके और ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
