लखनऊ। राजधानी के मोहनलालगंज क्षेत्र में सनसनी फैला देने वाले अलमास सिद्दीकी उर्फ अज्जू हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर सुलझा लिया है। सोमवार शाम से लापता अज्जू का शव मंगलवार को मऊ नहर में मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। हत्यारों ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए अज्जू के सिर और चेहरे पर भारी प्रहार कर उसे मौत के घाट उतारा था।
एकतरफा प्रेम बना हत्या की वजह
पुलिस की सघन पूछताछ में इस नृशंस हत्या के पीछे की जो वजह सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। जांच के अनुसार, यह पूरी वारदात एकतरफा प्रेम-प्रसंग की रंजिश का परिणाम थी। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से अज्जू को अपना निशाना बनाया। अभियुक्तों ने लकड़ी के भारी डंडों से अज्जू पर ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को नहर में फेंक दिया।
100 CCTV कैमरों और डिजिटल साक्ष्यों से मिला सुराग
घटना की गंभीरता को देखते हुए एडीसीपी, एसीपी और इंस्पेक्टर ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू की थी। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा गठित विशेष टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती हत्यारों की पहचान करना था। जांच टीम ने घटनास्थल और आसपास के रास्तों पर लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। डिजिटल साक्ष्यों और मुखबिरों की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस कड़ियां जोड़ती गई और अंततः तीन आरोपियों को दबोच लिया गया।
अभियुक्तों की गिरफ्तारी और बरामदगी
पकड़े गए आरोपियों की पहचान रमजान (पुत्र इस्माइल), अरमान (पुत्र इस्माइल) और सूरज (पुत्र पूर्णमासी) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर वारदात में प्रयुक्त महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- हत्या में इस्तेमाल किया गया लकड़ी का डंडा।
- मृतक का मोबाइल फोन, जिसे छिपा दिया गया था।
- घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना
पुलिस उपायुक्त (DCP) ने बताया कि आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। महज 12 घंटे के भीतर इस “अंधे कत्ल” का पर्दाफाश करने वाली मोहनलालगंज पुलिस की कार्यशैली की स्थानीय निवासियों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है। इस कार्रवाई ने अपराधियों के बीच कड़ा संदेश भेजा है कि कानून की पहुंच से बच पाना नामुमकिन है।
