मोहनलालगंज।लखनऊ, पीजीआई थाना क्षेत्र से धोखाधड़ी, मारपीट और जान से मारने की धमकी का एक गंभीर मामला सामने आया है। गोमती विहार कॉलोनी रिंग रोड तेलीबाग निवासी एवं भूतपूर्व सेवानिवृत्त सैनिक मिथिलेश कुमार पाठक ने तीन लोगों पर सुनियोजित साजिश के तहत लगभग सोलह लाख अस्सी हजार रुपये हड़पने और विरोध करने पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने से आहत होकर पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, लखनऊ में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। पीड़ित मिथिलेश कुमार पाठक एकता नगर, कल्ली पश्चिम रायबरेली रोड स्थित ‘पाठक ट्रेडर्स’ नाम से हार्डवेयर व बिल्डिंग मैटीरियल की दुकान संचालित करते हैं। उनके अनुसार निगोहां थाना क्षेत्र के उतरावां निवासी गिरीश शुक्ला दुकान पर अक्सर आते-जाते थे और सटरिंग का कार्य करने की बात कही। कुछ समय बाद गिरीश शुक्ला ने अपने परिचित विवेक दीक्षित व उनकी पत्नी नेहा त्रिवेदी से परिचय कराते हुए बताया कि वे साउथ सिटी, रायबरेली रोड में मकान निर्माण करा रहे हैं और भवन निर्माण सामग्री की आवश्यकता है।
प्रार्थी का आरोप है कि गिरीश शुक्ला के विश्वास और आश्वासन पर उन्होंने विवेक दीक्षित व नेहा त्रिवेदी को चरणबद्ध तरीके से लगभग बीस लाख रुपये का निर्माण सामग्री दे दिया। बाद में भुगतान मांगने पर विपक्षियों द्वारा मकान निर्माण पूर्ण होने के बाद भुगतान करने की बात कहकर टाल-मटोल की जाती रही। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब शेष 16,80,962 रुपये का भुगतान नहीं किया गया तो पीड़ित ने बीते 5 दिसंबर को विपक्षियों के घर जाकर बकाया धनराशि की मांग की।आरोप है कि उस समय गिरीश शुक्ला भी मौके पर मौजूद था। धनराशि की मांग करने पर विवेक दीक्षित व नेहा त्रिवेदी आक्रोशित हो गए और गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर गिरीश शुक्ला व विवेक दीक्षित ने मिलकर प्रार्थी के साथ मारपीट की और उसे धक्का दे दिया, जिससे वह गिर पड़ा। पीड़ित का कहना है कि किसी तरह जान बचाकर वह वहां से भागा, अन्यथा उसकी जान भी जा सकती थी।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षियों ने एकजुट होकर धमकी दी कि यदि दोबारा पैसे मांगे या पुलिस के पास गए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पीड़ित का कहना है कि इस घटना से उसे पूर्ण विश्वास हो गया है कि विपक्षियों ने सुनियोजित साजिश के तहत धोखाधड़ी की नीयत से उसकी रकम हड़प ली है।घटना के बाद पीड़ित ने थाना पीजीआई में मौखिक व लिखित शिकायत दी, साथ ही बुधवार को पुलिस आयुक्त लखनऊ को रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र भी भेजा, लेकिन आज तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही कोई कार्रवाई की गई। पीड़ित का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते उसकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही है।न्याय न मिलने से व्यथित होकर अब पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा के अंतर्गत प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने न्यायालय से मामले में हस्तक्षेप कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई कराए जाने की मांग की है।फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और स्थानीय लोगों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि पीड़ित को कब न्याय मिलता है।
