निकाह के चार माह बाद ही उजड़ा पत्नी का सुहाग…..
मोहनलालगंज।आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने और अपनों को खुशहाल देखने की चाहत लेकर कुवैत गए मोहनलालगंज के भदेसुआ गांव के युवक इश्तियाक (28) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, खुशियों की जगह चीख-पुकार मच गई। जिस घर से अभी चार महीने पहले ही निकाह की शहनाइयां गूंजी थीं, वहां अब मातम पसरा है। परिजनों ने मौत पर संदेह जताते हुए अनहोनी की आशंका जाहिर की है।परिजनों के अनुसार, बीती 13 अप्रैल को इश्तियाक ने कुवैत से अपनी पत्नी को फोन किया था। दोनों भविष्य की योजनाएं बना रहे थे कि अचानक फोन कट गया। पत्नी ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल बंद हो गया। कुछ ही पलों बाद एक कॉल आई, जिसने परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी। बताया गया कि इश्तियाक अब इस दुनिया में नहीं है। सहकर्मियों का कहना है कि इश्तियाक बाथरूम गए थे, जहां वह बेसुध मिले और उनकी जान चली गई।
मेहंदी का रंग अभी फीका भी न पड़ा था…
इश्तियाक की मौत ने पूरे भदेसुआ गांव को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि:24 नवंबर 2025 इश्तियाक का निकाह बड़ी धूमधाम से हुआ था।10 जनवरी 2026 परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह मैकेनिक की नौकरी पर कुवैत गया था।महज 3 महीने विदेश गए उसे अभी तीन महीने ही हुए थे कि यह वज्रपात हो गया। हाथों की मेहंदी का रंग अभी पूरी तरह उतरा भी नहीं था कि पत्नी का सिंदूर धुल गया। रो-रोकर पत्नी का हाल बेहाल है, वह बार-बार बेहोश हो रही है।
परिजनों को साजिश की आशंका, शव लाने की गुहार….
इश्तियाक के पिता और परिवार वाले इस ‘आकस्मिक मौत’ को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि इश्तियाक पूरी तरह स्वस्थ था, फिर अचानक बाथरूम में मौत कैसे हो सकती है? परिजनों ने किसी अनहोनी या साजिश की आशंका जताई है।पिता ने कहा मेंरा बेटा अपनों की खातिर परदेस गया था, हमें नहीं पता था कि वहां से उसका शव आएगा। सरकार से बस यही विनती है कि सच्चाई सामने लाए और मेरे बेटे का शव घर पहुंचा दे।
विदेश मंत्रालय से लगाई मदद की गुहार……
शोक संतप्त परिवार ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के माध्यम से भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा है। परिजनों ने मांग की है कि कुवैत स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर मौत के सही कारणों की जांच कराई जाए और इश्तियाक के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द लखनऊ लाने का प्रबंध किया जाए ताकि उसका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया जा सके।गांव के हर शख्स की आंखें नम हैं और हर कोई बस यही प्रार्थना कर रहा है कि इस दुख की घड़ी में परिवार को संबल मिले।
