अनुभव और मुस्कान को 12वीं तक मिलेगी मुफ्त शिक्षा, विद्यालय प्रबंधन की पहल ने पेश की मानवता की मिसाल…….
निगोहां, लखनऊ। परिवार के मुखिया की अचानक मौत के बाद दो मासूम बच्चों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया। घर की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी, ऐसे में पिता का साया उठ जाने से बच्चों की शिक्षा जारी रखना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया। इस कठिन घड़ी में एसबीएन इंटर कॉलेज, नारायणपुरी, रघुनाथ खेड़ा, निगोहां विद्यालय प्रबंधन ने संवेदनशील पहल करते हुए दोनों बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है।आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सरोज कुमार के आकस्मिक निधन के बाद उनके बच्चे अनुभव (कक्षा-4) और मुस्कान (कक्षा-7) की पढ़ाई को लेकर परिवार के सामने चिंता खड़ी हो गई थी। पिता के निधन के बाद बच्चों की आंखों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी, वहीं परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ उनकी पढ़ाई का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया था।ऐसे समय में एसबीएन इंटर कॉलेज के प्रबंधक अमरेन्द्र सिंह यादव ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए दोनों बच्चों को कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा देने की घोषणा की। विद्यालय के इस फैसले से न केवल बच्चों की पढ़ाई जारी रहने का रास्ता साफ हुआ, बल्कि शोकाकुल परिवार को भी बड़ी राहत मिली है।
प्रबंधक अमरेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि किसी बच्चे की शिक्षा केवल इसलिए नहीं रुकनी चाहिए कि उसके परिवार पर अचानक कोई विपत्ति आ गई है। उन्होंने कहा, “शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। परिवार में आई विपरीत परिस्थितियां उसके भविष्य की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। हमारा प्रयास है कि अनुभव और मुस्कान बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रखें और आगे चलकर अपने सपनों को साकार करें।
उन्होंने दिवंगत सरोज कुमार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति मिलने की कामना की।विद्यालय प्रबंधन के इस फैसले की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक मदद से बढ़कर किसी जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाना उसके भविष्य को संवारने का काम है। विद्यालय की इस पहल से यह संदेश भी गया है कि सामाजिक संस्थाएं और शिक्षण संस्थान चाहें तो विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंद परिवारों के लिए मजबूत सहारा बन सकते हैं।पिता के जाने का दर्द तो शायद कभी कम न हो, लेकिन विद्यालय के इस फैसले ने दोनों बच्चों के भविष्य की राह में उम्मीद की एक नई रोशनी जरूर जला दी है।
