कथा व्यास जयशंकर प्रसाद शुक्ला महाराज
निगोहां।लखनऊ,जब संसार से आशा टूटने लगती है, जब अपनों से ही पीड़ा मिलती है, तब मानव की आत्मा ईश्वर की शरण में शांति और समाधान खोजती है। ऐसा ही भाव ग्रामीण क्षेत्र दखिना गांव में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में देखने को मिला, जहां श्रद्धालु भारी संख्या में एकत्र होकर भगवान भोलेनाथ की महिमा का श्रवण कर रहे हैं।
कथाव्यास श्री जयशंकर प्रसाद शुक्ला जी महाराज ने कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “जब मनुष्य को संसार में चारों ओर से निराशा और दुःख मिलता है, तब वह प्रभु की शरण में आता है। भगवान शिव ऐसे देवता हैं जो बिना भेदभाव के सबको अपनाते हैं। उनमें परमगति और मोक्ष प्राप्ति संभव है।महाराज ने कथा के दौरान भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, उनके तांडव एवं सृजन शक्ति, तथा शिवपुराण के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शिव केवल विनाश के देवता नहीं हैं, बल्कि वे सृष्टि के पालक, संयम और करुणा के प्रतीक भी हैं।कथा के दौरान उन्होंने कहा, “शिव महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन का दर्शन भी है। इसमें जन्म, मृत्यु, कर्म, और मोक्ष के रहस्यों को विस्तार से समझाया गया है। जो मनुष्य सच्चे मन से शिव की भक्ति करता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन के हर संकट से मुक्ति मिलती है।”श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया। गांव की गलियों में धार्मिक संगीत गूंजता रहा और वातावरण शिव-भक्ति में सराबोर नजर आया। ग्रामीण महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर वातावरण को और अधिक पावन बना दिया। कथा में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और भगवान शिव की महिमा का रसपान कर रहे हैं।
शिव महापुराण कथा का आयोजन स्थानीय ग्रामवासी समिति द्वारा किया गया है, जिसमें सप्ताह भर चलने वाले धार्मिक कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। इसके अंतर्गत रुद्राभिषेक, भजन संध्या, और सामूहिक आरती का आयोजन भी किया जाएगा।
