
* कथावाचक पं. जय शंकर शुक्ला जी महाराज ने किया प्रकृति और परमात्मा के संबंध का गूढ़ विवेचन
लखनऊ। निगोहां क्षेत्र के दखिना गांव में चल रही शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन भक्तों की उपस्थिति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा का आयोजन समाजसेवी अनमोल तिवारी के सौजन्य से किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।कथा वाचक पंडित जय शंकर शुक्ला जी महाराज ने इस अवसर पर माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव से विवाह के दिव्य प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रस में सराबोर कर दिया।उन्होंने बताया कि भगवान शिव को प्राप्त करने हेतु माता पार्वती ने घोर तपस्या की, जो इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर को पाने के लिए मनुष्य को समर्पण, साधना और संयम का मार्ग अपनाना होता है।कथा के दौरान पं. शुक्ला जी ने प्रकृति और परमात्मा के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा,माता भवानी ने भगवान शिव से कहा कि कर्म की शक्ति ही प्रकृति कहलाती है, और उसी से सृष्टि की उत्पत्ति, पालन तथा संहार होता है। प्राणी मात्र प्रकृति के प्रभाव से ही ईश्वर की उपासना, अर्चना और ध्यान करते हैं।उन्होंने आगे कहा कि भगवान शिव, जो कि योगेश्वर और इंद्रियों से परे हैं, उन्होंने गिरिराज हिमालय और माता पार्वती की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें अपनी सेवा में स्थान दिया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य का परम कर्तव्य ईश्वर की आराधना एवं साधना करना है।पं. शुक्ला जी महाराज ने यह भी बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह ईश्वर से प्राप्त शक्ति और प्रेरणा को अपने जीवन में उतारने का निरंतर प्रयास करे, यही सच्चा धर्म और जीवन की दिशा है।कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा। श्रोताओं ने कथा के दिव्य प्रसंगों में भावविभोर होकर भक्ति रस का आनंद लिया।समाजसेवी अनमोल तिवारी ने बताया कि शिव कथा का उद्देश्य समाज में धार्मिक और नैतिक मूल्यों का जागरण करना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस आध्यात्मिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करें।