
नन्हें बच्चों की पढ़ाई और पोषण योजना ठप, ग्रामीणों में रोष प्रशासन ने ली जांच की जिम्मेदारी
लखनऊ।मोहनलालगंज विकास खंड क्षेत्र के उत्तर गांव में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले सात महीनों से बंद पड़ा है। केंद्र पर ताला लटकने से नन्हें बच्चों की पढ़ाई और पोषण योजना दोनों ठप हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह जिम्मेदार विभाग की गंभीर लापरवाही है, जिससे गांव के बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है।ग्राम प्रधान ज्ञान यादव ने बताया कि करीब छह महीने पहले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था। उनके जाने के बाद से केंद्र पूरी तरह बंद है और अब तक विभाग द्वारा नई कार्यकत्री की नियुक्ति नहीं की गई। नतीजतन, बच्चों को न तो आंगनबाड़ी में पढ़ाई की सुविधा मिल पा रही है और न ही पोषण योजना का लाभ।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते गांव के छोटे-छोटे बच्चे कुपोषण और शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। गांव की महिलाओं का कहना है कि पहले आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों को नियमित पोषाहार मिलता था, जिससे उनका स्वास्थ्य संतुलित रहता था। वहीं, पढ़ाई का शुरुआती प्रशिक्षण भी बच्चों को यहां दिया जाता था। लेकिन लंबे समय से केंद्र बंद होने के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।गांव की निवासी सुमित्रा देवी बताती हैं,हमारे छोटे बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र से पढ़ना-लिखना शुरू करते थे। अब महीनों से ताला बंद है। घर पर पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता। बच्चों का समय बर्बाद हो रहा है।इसी तरह रेखा यादव ने कहा,पहले केंद्र से बच्चों को खिचड़ी और पोषाहार मिलता था। अब वो सब बंद है। गरीब परिवारों के बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। हमें डर है कि कहीं कुपोषण का शिकार न हो जाएं।गांव के युवक अखिलेश का कहना है, “आज जब सरकार बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर करोड़ों खर्च कर रही है, तब भी हमारे गांव में सात महीने से केंद्र बंद पड़ा है। यह विभागीय लापरवाही है।ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर मुद्दा उठाया, जिससे प्रशासन का ध्यान आकर्षित हुआ।मामले पर संज्ञान लेते हुए उप जिलाधिकारी पवन पटेल ने कहा कि जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि आखिर केंद्र इतने लंबे समय से क्यों बंद पड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही नई कार्यकत्री की नियुक्ति कर केंद्र को चालू कराया जाएगा।ग्रामीण अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन गंभीरता से कदम उठाएगा और गांव के नन्हें-मुन्नों की पढ़ाई व पोषण योजनाएं फिर से पटरी पर लौटेंगी।