लखनऊ, मोहनलालगंज नगर पंचायत मऊ कस्बे में जय मां दुर्गे श्रीकृष्ण लीला समिति द्वारा आयोजित कृष्ण लीला महोत्सव में तीसरे दिन रविवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, उनकी बाल लीलाओं, पूतना वध तथा भगवान शिव के दर्शन जैसे दिव्य प्रसंगों का जीवंत मंचन हुआ। समिति के डायरेक्टर राजेंद्र कुमार गुप्ता के शानदार निर्देशन और कलाकारों की बेहतरीन प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।मंचन की शुरुआत कंस द्वारा देवकी के सातवें गर्भ को नष्ट करने के प्रयास से हुई। कथा के अनुसार भगवान के आदेश से वह गर्भ महामाया द्वारा सुरक्षित रूप से निकालकर नंदराय की पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया जाता है, जिससे बलराम का जन्म होता है। इसके बाद दृश्य में देवकी के आठवें गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होता है।कृष्ण जन्म के साथ ही मंचन में दर्शाया गया कि कैसे महामाया वसुदेव को आदेश देती हैं कि नवजात कृष्ण को गोकुल में यशोदा के पास छोड़ आएं।अंधेरी रात, घोर वर्षा और उफनती यमुना नदी पार करते समय शेषनाग का अपने फन फैलाकर शिशु को बारिश से बचाना देख दर्शक भाव-विभोर हो उठे। वसुदेव द्वारा कृष्ण को यशोदा के पास छोड़कर उनकी पुत्री को कारागार में लाना कथा को और भी रोमांचकारी बना गया।इसके बाद मंचन में कृष्ण की कई बाल लीलाओं का चित्रण हुआ। ग्वालिनों के घरों से माखन चोरी और घर में पकड़े जाने पर यशोदा मैया को मैया मैं नहीं माखन खायो” गीत गाकर मनाने का दृश्य दर्शकों को बेहद भावुक कर गया। इसी क्रम में कृष्ण द्वारा राक्षसी पूतना का वध प्रस्तुत किया गया, जो कंस द्वारा बालकृष्ण को मारने भेजी गई थी।कार्यक्रम के अंतिम दृश्य में भगवान शिव का प्रवेश हुआ, जो स्वयं बालकृष्ण के दर्शन करने आते हैं। इस प्रसंग ने दर्शाया कि स्वयं शिवजी भी कृष्ण की महानता को स्वीकार करते हैं।पूरे मंचन के दौरान कृष्ण कन्हैया लाल की जय और हरे कृष्णा हरे कृष्णा” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। मंचन स्थल पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने देर रात तक मंचन का आनंद लिया।इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि अजय पांडेय सत्यम विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन समाज में आस्था और एकता को मजबूत करते हैं।
