चालीस वर्ष पुराने भवन में पढ़ते थे तीस मासूम बच्चे, दो लाख का सामान मलबे में दबा प्रधान ने अधिकारियों पर लगाया लापरवाही का आरोप…….
मोहनलालगंज,मोहनलालगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत भदेसुवा के मजरा मंसबखेड़ा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की जर्जर छत रविवार देर रात तेज बारिश के दौरान भरभराकर गिर गई। हादसा रात करीब दो बजे हुआ, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यदि यह घटना दिन के समय होती, जब केंद्र में बच्चे मौजूद रहते हैं, तो लगभग तीस मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती थी।ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र का भवन करीब चालीस वर्ष पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। लंबे समय से भवन की छत और दीवारों में दरारें पड़ चुकी थीं, लेकिन इसके बावजूद इसी भवन में बच्चों की पढ़ाई और अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। रविवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश के कारण भवन की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो गया।हादसे में आंगनबाड़ी केंद्र के भीतर रखा करीब दो लाख रुपये मूल्य का फर्नीचर, बच्चों की अध्ययन सामग्री, पोषण संबंधी उपकरण, अभिलेख और अन्य सामान मलबे में दब गया। घटना की जानकारी सोमवार सुबह ग्रामीणों को हुई तो मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।ग्राम प्रधान मोनू यादव ने बताया कि जर्जर भवन की स्थिति को लेकर कई बार खंड विकास अधिकारी मोहनलालगंज से शिकायत कर नए भवन के निर्माण अथवा मरम्मत की मांग की गई थी। इसके बावजूद किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि अधिकारियों की अनदेखी के कारण बच्चों की जान जोखिम में डालकर केंद्र का संचालन कराया जा रहा था।ग्रामीणों ने भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते भवन को अनुपयोगी घोषित कर नया निर्माण कराया गया होता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। उनका कहना है कि अब भी क्षेत्र के कई सरकारी भवन जर्जर अवस्था में हैं, जिनकी समय रहते जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।ग्राम प्रधान के अनुसार घटना की सूचना तत्काल बीडीओ मोहनलालगंज को दे दी गई थी, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके का निरीक्षण करने नहीं पहुंचा था। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, क्षतिग्रस्त सामान का आकलन कर मुआवजा दिलाने तथा नए आंगनबाड़ी भवन का शीघ्र निर्माण कराने की मांग की है।ग्रामीणों की मांग है कि जब तक नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक बच्चों की पढ़ाई किसी सुरक्षित स्थान पर संचालित कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
