पीजीआई, लखनऊ।पीजीआई थाना क्षेत्र के अमोल गांव में एक गरीब परिवार का आशियाना देर रात ढहाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि निजी बिल्डर कंपनी ओमेक्स सिटी से जुड़े लोगों ने जेसीबी मशीन से पीड़ित का मकान गिरा दिया, जिससे पूरा परिवार बेघर हो गया। घटना से आक्रोशित पीड़ित परिवार रविवार को पीजीआई थाने पहुंचकर न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठ गया।प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल्ली पश्चिम क्षेत्र के अमोल गांव निवासी रमेश ने बताया कि वह पिछले करीब 30 वर्षों से अपने परिवार के साथ यहां रह रहा था। उसने अपनी पैतृक जमीन बेचकर कल्ली माती मार्ग पर मकान बनवाया था। पीड़ित के मुताबिक, उसके मकान के पास ही ओमेक्स बिल्डर्स द्वारा निर्माण कार्य चल रहा है।रमेश का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी कुलदीप सिंह कई बार उसके मकान को हटाने का दबाव बना चुके थे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच करीब 15 लाख रुपये में मकान के मुआवजे को लेकर सहमति भी बनी थी, लेकिन आरोप है कि तय समझौते के बावजूद कंपनी ने जबरन कार्रवाई कर दी।
पीड़ित ने बताया कि बीते 12 मार्च को वह अपने परिवार के साथ खेतों में था। इसी दौरान रात करीब 11 बजे कंपनी से जुड़े तीन लोग जेसीबी मशीन लेकर पहुंचे और बिना किसी सूचना के उसका मकान गिरा दिया। जब उसे घटना की जानकारी मिली और वह मौके पर पहुंचा, तब तक आरोपी जेसीबी लेकर फरार हो चुके थे।मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब अगले दिन गुड्डू तिवारी नामक व्यक्ति ने समझौते के नाम पर पीड़ित को अपनी दुकान पर बुलाया। वहां कथित रूप से कम पैसे देने का दबाव बनाया गया। जब पीड़ित ने इंकार किया तो आरोप है कि गुड्डू के भतीजे सूरज ने डंडा लेकर उस पर हमला करने की कोशिश की, जिससे वह जान बचाकर मौके से भाग निकला।पीड़ित का कहना है कि उसने इस पूरे मामले की तहरीर पीजीआई थाने में दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर रविवार को वह अपने परिवार सहित थाने पहुंचा और धरने पर बैठकर न्याय की गुहार लगाने लगा।धरने की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिवार को समझाने का प्रयास किया, लेकिन पीड़ित कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा। काफी समझाने के बाद पुलिस ने उसे घर भेज दिया।
इस संबंध में पीजीआई इंस्पेक्टर धीरेंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत प्राप्त कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।अब देखना होगा कि प्रशासन इस गरीब परिवार को कब तक न्याय दिला पाता है या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
