निगोहां, लखनऊ।निगोहां कस्बे में स्थित एक इंडियन गैस एजेंसी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी ने एजेंसी संचालक पर अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और गैस वितरण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए निगोहां थाने में तहरीर दी है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।भाजपा निगोहां मंडल के महामंत्री प्रांशु चौरसिया ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्हें एक पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए गैस सिलेंडर की आवश्यकता थी। इसी सिलसिले में वह कस्बे की इंडियन गैस एजेंसी पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर पहले ही सिलेंडर जारी किया जा चुका है, जबकि उन्हें कोई सिलेंडर प्राप्त ही नहीं हुआ था।
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने इस विसंगति को लेकर एजेंसी संचालक और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। गाली-गलौज के साथ उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि एजेंसी पर गैस सिलेंडर तय सरकारी दरों से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं। उपभोक्ताओं से खुलेआम 1150 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जो कि नियमों के विपरीत है। इससे आम जनता का आर्थिक शोषण हो रहा हैशिकायती पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि एजेंसी संचालक अन्य उपभोक्ताओं के नाम पर सिलेंडर जारी कर उनका दुरुपयोग कर रहा है। इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों का भी सीधा हनन हैं।
सिलेंडर आया मानिए स्थानीय लोगों में व्यंग्य और नाराजगी……
मामले के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच एजेंसी को लेकर व्यंग्य और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। स्थानीय लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि यहां “सिलेंडर मिले या न मिले, रिकॉर्ड में समय से डिलीवरी हो जाती है।कुछ लोगों ने इसे अदृश्य डिलीवरी सिस्टम बताते हुए कहा कि उपभोक्ता को जानकारी तक नहीं होती और कागजों में सिलेंडर जारी दिखा दिया जाता है।निगोहां थाना प्रभारी अनुज तिवारी ने बताया कि मामले में तहरीर प्राप्त हो चुकी है। गैस एजेंसी पर लगे अनियमितता, कालाबाजारी और अभद्रता के आरोपों की गहन जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूरे मामले ने गैस वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी का मामला है, बल्कि सरकारी नियमों की खुली अनदेखी भी है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
