बाल कृष्ण की नटखट लीलाओं और गोवर्धन पर्वत उठाने के दृश्य पर जयकारों से गूंजा पंडाल, भक्तिरस में सराबोर हुए श्रद्धालु——
मोहनलालगंज, लखनऊ। मोहनलालगंज नगर पंचायत क्षेत्र के मऊ बाजार में जय मां दुर्गे कृष्ण लीला समिति की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्रीकृष्ण लीला महोत्सव में विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। समिति के निर्देशक राजेंद्र गुप्ता’ के निर्देशन में कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर गोवर्धन लीला तक के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंचन के दौरान पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा और विभिन्न लीलाओं के दृश्यों पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गणेश, बालाजी और मां दुर्गा की आरती के साथ हुआ। इसके बाद कलाकारों ने एक के बाद एक धार्मिक प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी महिमा से परिचित कराया। मंच पर प्रस्तुत प्रसंगों में भक्ति, वात्सल्य, हास्य और भगवान श्रीकृष्ण के पराक्रम का सुंदर समन्वय देखने को मिला।मंचन के दौरान माखन चोरी लीला ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण की नटखट अदाओं, ग्वाल-बालों के साथ माखन चोरी करने और गोपियों के साथ होने वाली मीठी नोक-झोंक को कलाकारों ने आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। श्रीकृष्ण की बाल सुलभ शरारतों को देखकर दर्शक भाव-विभोर हो गए। इस लीला ने भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप और ब्रज की पारंपरिक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।चंद्र खिलौना लीला के मंचन में बाल कृष्ण द्वारा चंद्रमा को खिलौने के रूप में पाने की जिद और माता यशोदा के वात्सल्यपूर्ण व्यवहार को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। बाल कृष्ण की मनमोहक जिद और माता यशोदा के स्नेह से जुड़े दृश्यों ने दर्शकों के मन को छू लिया। इस प्रसंग में मां और पुत्र के बीच प्रेम, ममता और वात्सल्य की भावना को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया।मनिहारिन लीला भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के मनिहारिन के रूप में चूड़ियां बेचने और राधा जी व गोपियों के साथ हंसी-मजाक तथा मीठी नोक-झोंक के प्रसंगों को मंचित किया गया। कलाकारों के संवाद और अभिनय ने दर्शकों को खूब आनंदित किया। लीला के दौरान पंडाल में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।धार्मिक प्रसंगों के क्रम में अघासुर वध की लीला का भी मंचन किया गया। इसमें कंस द्वारा भेजे गए राक्षस अघासुर से ग्वाल-बालों की रक्षा करने और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उसका वध किए जाने के प्रसंग को नाटकीय अंदाज में प्रस्तुत किया गया। राक्षस के भयावह रूप और भगवान कृष्ण के पराक्रम से जुड़े दृश्यों ने दर्शकों में रोमांच पैदा कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी दिया गया।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण गोवर्धन लीला रही। कलाकारों ने भगवान इंद्र के अहंकार को समाप्त करने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाने के प्रसंग का सजीव मंचन किया। गोवर्धन पर्वत उठाने का दृश्य सामने आते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाने लगे। इस लीला में प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिक आस्था और अहंकार के त्याग का संदेश भी देखने को मिला।मऊ बाजार में आयोजित कृष्ण लीला महोत्सव के मंचन ने धार्मिक आस्था के साथ भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक रंगमंच की छटा बिखेरी। निर्देशक राजेंद्र गुप्ता ‘बीबी’ के निर्देशन में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जोड़ते हुए भक्ति रस में सराबोर कर दिया। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को धार्मिक प्रसंगों, सांस्कृतिक परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े संदेशों को जानने का अवसर भी मिला। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल बना रहा।
