लखनऊ। निगोहा क्षेत्र में पुलिस प्रशासन की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पूरा मामला निगोहां थाना क्षेत्र के गांव नटोली का है, जहां की निवासी कृष्णावती पत्नी सत्रोहन लाल ने अपने देवर बुद्धिलाल पुत्र रामस्वरूप पर ज़मीन पर जबरन बोरिंग कराने और बंटवारे से इनकार करने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने बताया कि जमीन संबंधी विवाद उपजिलाधिकारी न्यायालय में राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत विचाराधीन है। बुद्धिलाल बनाम श्रीमती कृष्णावती आदि शीर्षक से मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। ऐसे में किसी भी प्रकार की ज़मीन पर कार्यवाही कानून की अवहेलना मानी जाएगी।पीड़िता का कहना है कि जब उनके देवर द्वारा ज़बरदस्ती भूमि पर बोरिंग कराई जा रही थी, तब उन्होंने इसकी शिकायत उपजिलाधिकारी से की। एसडीएम ने निगोहां थाना को स्पष्ट निर्देश दिए कि विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार की जबरन कार्यवाही को रोका जाए और शांति व्यवस्था बनाए रखी जाए।एसडीएम के स्पष्ट आदेश के बावजूद निगोहां थानाध्यक्ष अनुज कुमार तिवारी की भूमिका पीड़िता के लिए राहत भरी नहीं रही। पीड़िता का आरोप है कि थाने पर पहुंचने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। पुलिस ने मौके पर जाकर न तो बोरिंग रुकवाई और न ही मामले की निष्पक्ष जांच की।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निगोहां पुलिस प्रायः ज़मीन संबंधी विवादों में निष्पक्ष भूमिका नहीं निभाती। ऐसे मामलों में अक्सर फरियादी को थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं और प्रभावशाली पक्ष की बात को ही तरजीह दी जाती है।कानूनी रूप से जब कोई भूमि विवाद न्यायालय में लंबित हो, तब किसी भी पक्ष द्वारा ज़बरन उस भूमि पर कोई निर्माण या बदलाव करना अवैध माना जाता है। ऐसे में पुलिस की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह शांति व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करे।फिलहाल पीड़िता को उम्मीद है कि उच्चाधिकारियों द्वारा मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कार्यवाही की जाएगी और उन्हें न्याय मिलेगा। सवाल यह भी उठ रहा है कि एसडीएम के आदेशों की अवहेलना पर निगोहां थाने पर कोई प्रशासनिक कार्यवाही होगी या नहीं।
