निगोहां। लखनऊ,निगोहां क्षेत्र के परसपुर ठठ्ठा गांव स्थित मिनी सचिवालय में बुधवार को किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से रोकने और इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना रहा। यह कार्यक्रम प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजीड्यू (सी.आर.एम.) योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा आयोजित किया गया।गोष्ठी में कृषि विभाग के प्रविधिक सहायक सर्वेश रावत ने दर्जनों किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाने से न केवल पर्यावरण को हानि होती है, बल्कि खेत की उर्वरता पर भी बुरा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें वातावरण में फैलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और स्मॉग की समस्या उत्पन्न होती है।
सर्वेश रावत ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। साथ ही, मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीव मर जाते हैं, जिससे खेत की उर्वरता और नमी बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है। यह न केवल फसलों की उत्पादकता घटाता है, बल्कि दीर्घकाल में मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।उन्होंने किसानों से पराली जलाने की बजाय उसे कृषि यंत्रों से नष्ट करने या कम्पोस्ट खाद के रूप में उपयोग करने की सलाह दी। किसानों को पराली न जलाने की शपथ भी दिलाई गई।ग्राम प्रधानपति मातादीन ने भी किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने जैसी हानिकारक परंपरा से बचें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं।गोष्ठी में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे और उन्होंने कृषि विभाग द्वारा दी गई जानकारियों को ध्यानपूर्वक सुना। किसानों ने भरोसा जताया कि वे आगामी सीजन में पराली न जलाने का संकल्प पूरा करेंगे।
