सालों से एक ही तहसील में जमा है पेशकार, कोर्ट के फैसलों को प्रभावित करने के लग रहे आरोप
जिलाधिकारी से ‘सीधी सेटिंग’ की चर्चा, आला अधिकारी भी कार्रवाई से कतरा रहे
मोहनलालगंज ।संवाददाता
राजधानी की मोहनलालगंज तहसील इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली से ज्यादा एक ‘प्रभावशाली पेशकार’ की कारगुजारियों को लेकर सुर्खियों में है। तहसील परिसर के गलियारों से लेकर बार एसोसिएशन के चैंबरों तक, इस पेशकार के रसूख और कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि उक्त कर्मचारी अपनी ऊंची पहुंच के दम पर न केवल नियम-कायदों को ताक पर रख रहा है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में भी सीधा हस्तक्षेप कर रहा है।
कुर्सी से ऐसा मोह, हटने के बाद फिर पा ली तैनाती
तहसील के अधिवक्ताओं का कहना है कि एक विशिष्ट कोर्ट में तैनात यह पेशकार पिछले कई वर्षों से मोहनलालगंज में ही जमा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व में शिकायतों के आधार पर इसे हटाया भी जा चुका है, लेकिन अपने ‘सिस्टम’ और रसूख के चलते वह दोबारा इसी तहसील में मलाईदार कुर्सी पाने में सफल रहा। वकीलों के बीच चर्चा है कि इस पेशकार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि स्थानांतरण की फाइलें इसके रसूख के आगे दम तोड़ देती हैं।
अन्य कोर्टों में भी चलता है ‘सिक्का’
नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि इस पेशकार का प्रभाव सिर्फ अपनी ही कोर्ट तक सीमित नहीं है। तहसील की अन्य अदालतों में भी इसके इशारे पर फैसले प्रभावित होने की चर्चाएं आम हैं। आरोप तो यहाँ तक हैं कि कई अधिकारी भी आदेश तैयार करने से पहले उक्त पेशकार से ‘मशविरा’ लेते हैं। वहीं, तहसील के कर्मचारी भी खौफ के साये में हैं। कर्मचारियों का कहना है कि विरोध करने पर विभागीय प्रताड़ना और प्रतिकूल प्रविष्टि का डर दिखाया जाता है।
दलालों का सिंडिकेट और ‘साहब’ से सीधा संपर्क
अधिवक्ताओं ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि तहसील परिसर में सक्रिय दलालों के सिंडिकेट को इसी पेशकार का संरक्षण प्राप्त है। क्षेत्र के दलाल सीधे पेशकार से संपर्क कर काम कराने का दावा करते हैं, जिससे आम जनता का शोषण हो रहा है। तहसील के गलियारों में यह भी चर्चा जोरों पर है कि पेशकार का जिलाधिकारी कार्यालय के कुछ रसूखदारों से सीधा गठजोड़ है, जिसके कारण स्थानीय अधिकारी उस पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं।
