मोहनलालगंज, लखनऊ।राजधानी लखनऊ की मोहनलालगंज तहसील इन दिनों भ्रष्टाचार, दलाली और रसूखदारों के कब्जे का अड्डा बनती जा रही है। तहसील में तैनात पेशकारों की एक कथित ‘तिगड़ी’ पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले लिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बिना इस तिगड़ी की मर्जी के कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है।अधिवक्ताओं का आरोप है कि पेशकारों की यह तिकड़ी खुलेआम ‘सेटिंग-गेटिंग’ का खेल खेल रही है। सीधे फरियादियों से संपर्क कर मोटी रकम लेकर काम कराने का ठेका लिया जा रहा है। इससे न सिर्फ न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि वकीलों की भूमिका को भी दरकिनार किया जा रहा है।
वकीलों का आरोप कि तहसील में दलालों का कब्जा ……
तहसील परिसर में अब अधिवक्ताओं से ज्यादा बाहरी दलालों और बिल्डरों की भीड़ दिखाई दे रही है। वकीलों का कहना है कि जो व्यक्ति इस सिंडिकेट का हिस्सा नहीं बनता, उसकी फाइल महीनों तक लंबित रखी जाती है। इससे आम जनता को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।अभी एक ताजा मामला एक बाबू से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसे मृतक आश्रित के आधार पर नौकरी मिली थी। आरोप है कि उसने धारा-98 से जुड़ी फाइलों को प्रभावित करने और पक्ष में रिपोर्ट लगवाने के नाम पर लाखों रुपये का लेनदेन किया। इस कथित सौदे की खबर जैसे ही अधिवक्ताओं तक पहुंची, तहसील परिसर में आक्रोश फैल गया।हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की गूंज तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक पहुंच चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया है कि आखिर इन पेशकारों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या इस भ्रष्टाचार की जड़ें ऊपर तक फैली हुई हैं।पेशकारो की तिगड़ी के बढ़ते प्रभाव और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अब अधिवक्ता संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन पेशकारों पर कार्रवाई नहीं की गई और इनके पटल नहीं बदले गए, तो तहसील में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि तहसील का संचालन बिल्डरों और दलालों के इशारे पर होगा, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा।वकीलों के मान-सम्मान की रक्षा कौन करेगा। और सबसे बड़ा सवाल आखिर अधिकारी तमाशबीन क्यों बने हुए हैं।अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर मोहनलालगंज तहसील में भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही जारी रहेगा।
