अधिवक्ता ऋषि द्विवेदी बोले— जनता और किसानों के हितों पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं, मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन होगा और व्यापक
मोहनलालगंज, लखनऊ नई रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को मोहनलालगंज तहसील परिसर अधिवक्ताओं के आंदोलन का केंद्र बन गया। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर शासन के निर्णय के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय न केवल अधिवक्ताओं के हितों के विपरीत है, बल्कि इससे आम नागरिकों, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं का कहना था कि नई रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद भूमि एवं संपत्ति से जुड़े कार्यों में अनावश्यक जटिलताएं बढ़ेंगी। इससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, समय की बर्बादी होगी और आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण व्यवस्था को लागू करने से पहले अधिवक्ता संगठनों, राजस्व विभाग से जुड़े विशेषज्ञों तथा आम नागरिकों से कोई व्यापक विचार-विमर्श नहीं किया, जिससे लोगों में असंतोष व्याप्त है।प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता ऋषि द्विवेदी ने कहा कि अधिवक्ता समाज जनता के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि नई रजिस्ट्री व्यवस्था न्यायसंगत नहीं है और इससे तहसीलों में होने वाले भूमि संबंधी कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक सरकार इस संबंध में जारी अधिसूचना को वापस नहीं लेती, तब तक अधिवक्ता लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। यदि आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप भी दिया जाएगा।ऋषि द्विवेदी ने कहा कि यह संघर्ष केवल अधिवक्ताओं के अधिकारों का नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों, ग्रामीणों और आम नागरिकों का है जो प्रतिदिन अपनी जमीन, मकान और अन्य संपत्ति संबंधी कार्यों के लिए तहसील पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे और न्यायिक एवं राजस्व कार्यों की गति भी प्रभावित हो सकती है।प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता शिव अटल सिंह ने भी शासन से नई रजिस्ट्री व्यवस्था को तत्काल निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले अधिवक्ता संगठनों, राजस्व अधिकारियों और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि व्यवहारिक कठिनाइयों का समाधान पहले ही किया जा सके। उन्होंने कहा कि बिना तैयारी और बिना सुझाव लिए लागू की गई व्यवस्था आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और अधिक तेज किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर कार्य बहिष्कार, धरना-प्रदर्शन और बड़े स्तर पर जनआंदोलन का भी निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने शासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर अधिवक्ताओं एवं आम जनता की समस्याओं का समाधान करने की अपील की।प्रदर्शन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, लेकिन अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक नई रजिस्ट्री व्यवस्था संबंधी अधिसूचना वापस नहीं ली जाती, उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
