कई वर्षों से आवास के लिए अधिकारियों से लगा रहा था गुहार, मकान गिरने के बाद बेघर हुआ परिवार……
मोहनलालगंज, लखनऊ। नागपंचमी के पावन पर्व पर जहां लोग त्योहार की खुशियां मना रहे थे, वहीं निगोहां क्षेत्र के हरि कुंवर खेड़ा गांव में एक गरीब मजदूर परिवार की खुशियां उस समय मातम में बदलते-बदलते बच गईं, जब लगातार हो रही बारिश के चलते उनका वर्षों पुराना कच्चा और जर्जर मकान भरभराकर ढह गया। मकान गिरने के दौरान परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गया है।जानकारी के मुताबिक निगोहां थाना क्षेत्र के रघुनाथ खेड़ा मजरा हरि कुंवर खेड़ा गांव निवासी गरीब मजदूर हार्दिक का परिवार कई वर्षों से कच्चे और जर्जर मकान में रहकर गुजर-बसर कर रहा था। लगातार बारिश के कारण मकान की दीवारें पहले से ही कमजोर हो चुकी थीं। सोमवार को अचानक जर्जर मकान भरभराकर गिर पड़ा। गनीमत रही कि मकान गिरने के समय परिवार के सदस्य इसकी चपेट में नहीं आए और एक बड़ा हादसा टल गया।परिवार के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान पाने के लिए उन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन अभी तक उन्हें आवास का लाभ नहीं मिल सका। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पात्र होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला।
मकान गिरने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय लेखपाल…..
गरीब परिवार का कच्चा मकान गिरने की सूचना मिलने के बाद संबंधित लेखपाल मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। लेखपाल ने मकान गिरने से हुए नुकसान का जायजा लेने के साथ ही पीड़ित परिवार से आवश्यक दस्तावेज भी लिए। उन्होंने परिवार को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई और मदद का भरोसा दिलाया।पीड़ित हार्दिक ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलता है। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों से प्रधानमंत्री आवास दिलाए जाने की मांग की गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस मदद नहीं मिली। अब मकान पूरी तरह गिर जाने के बाद परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है।ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार की स्थिति को देखते हुए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए और पात्रता की जांच कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिलाया जाए, ताकि परिवार को दोबारा जर्जर मकान या खुले आसमान के नीचे जीवन न बिताना पड़े।
