
लखनऊ। मोहनलालगंज कस्बे के कालेवीर बाबा मंदिर प्रांगण में चल रही श्री रामकथा में छठे दिन शुक्रवार कथा व्यास मारुति नंदन जी महाराज ने महर्षि विश्वामित्र द्वारा अपने यज्ञ रक्षा हेतु श्री राम और लक्ष्मण को मांगे जाने, श्री राम और लक्ष्मण का यज्ञ रक्षा हेतु जाने, ताड़का बंध, सुबाहु वध, यज्ञ रक्षा, अहिल्या उद्धार, धनुष भंग और सीता राम विवाह की कथा का संगीतमय सुन्दर वर्णन किया।कथा व्यास मारुति नन्दन महाराज ने आज की कथा का शुभारंभ बाबा तुलसी की इस चौपाई से किया ” गाधि तनय मन चिंता व्यापी, हरि बिनु मरहिं न निसिचर पापी। कथा व्यास ने कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यज्ञ की रक्षा हेतु महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं। राजा दशरथ विश्वामित्र का स्वागत सत्कार करते हैं। महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ को बताया कि वह जब यज्ञ करते हैं तब राक्षस यज्ञ को नष्ट-भ्रष्ट कर देते हैं। राजा दशरथ से विश्वामित्र ने श्रीराम और लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा हेतु साथ भेजने की जब बात कही तब महाराज दशरथ बेचैन हो गए और राम-लक्ष्मण को भेजने से मना कर दिया किन्तु गुरु वशिष्ठ के समझाने पर राजा दशरथ ने राम लक्ष्मण को महर्षि विश्वामित्र के साथ भेज दिया।श्री रामकथा में मुख्य यजमान हरि गोविन्द मिश्र व गोपाल शुक्ला,कोषाध्यक्ष विजय द्विवेदी, सदस्य देवी शंकर त्रिवेदी, अजय शुक्ला, शिक्षिका शालिनी तिवारी,राकेश मिश्रा, हरी शंकर शुक्ल,बसन्त मिश्रा,वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश द्विवेदी,ललित दीक्षित समेत कथा व्यवस्थापक पं० कृष्णा नंद महाराज समेत क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।