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राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भाव-विभोर हुए भक्त…

  • कथा में पहुंचे हजारों लोग—— मोहनलालगंज।मोह‌नलालगंज के रायभान खेडा गांव में पद्मजा वेलफेयर ट्रस्ट के सीएमडी राजीव सिंह द्वारा न्यू जेल स्तिथ पद्मजा फेस 4 में किए जा रहे रामकथा के अंतिम दिन गुरुवार को हजरों की संख्या में ग्रामीण कथा सुनने के लिए उमड़ पड़े।
  • कथा पधारे कथावाचक कुलदीप जी महाराज ने कथा में राम वनवास, भरत मिलाप और राम-केवट संवाद की कथा का प्रसंग सुनाया गया।महाराज ने कहा कि भरत जैसा भाई इस युग में मिलना मुश्किल है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गये।मानस किंकर जी महाराज ने कहा कि भगवान राम मर्यादा स्थापित करने को मानव शरीर में अवतरित हुए। पिता की आज्ञा पर वह वन चले गए। भगवान राम वन जाने के लिए गंगा घाट पर खड़े होकर केवट से नाव लाने को कहते हैं, लेकिन केवट मना कर देता है और पहले पैर पखारने की बात कहता है। केवट भगवान का पैर धुले बगैर नाव में बैठाने को तैयार नहीं होता है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर श्रोता आनंदित उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श समाज में आज भी कायम है। भगवान प्रेम भाव देने वाले का हमेशा कल्याण करते हैं। कहा कि भरत ने भगवान राम के वनवास जाने के बाद खड़ाऊं को सिर पर रखकर राजभोग की बजाय तपस्या की। कहा कि जीवन में भक्ति और उपासना का अलग महत्व है। निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
    पद्मजा ग्रुप के सीएमडी राजीव सिंह ने बताया कि कथा के समापन के बाद शुक्रवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है।

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