मोहनलालगंज।लखनऊ,मोहनलालगंज विकास खण्ड क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर नदौली इंटरनेशनल ड्रेन एवं कांटा ड्रेन की सफाई का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। इस संबंध में गुरुवार को शारदा नहर कैनाल के जूनियर इंजीनियर रमेश चंद्र ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पदाधिकारियों और किसानों के साथ ड्रेन का स्थलीय निरीक्षण किया तथा सफाई कार्य की रूपरेखा तैयार की।निरीक्षण के दौरान जेई रमेश चंद्र ने बताया कि नदौली इंटरनेशनल ड्रेन, जिसे स्थानीय स्तर पर बिजरा ड्रेन के नाम से भी जाना जाता है, डिघारी गांव से निकलकर रामदासपुर, पुरहिया होते हुए सब्जी गांव के पास सई नदी में जाकर मिलती है। इस ड्रेन की कुल लंबाई लगभग 19 किलोमीटर 300 मीटर है। उन्होंने बताया कि कई वर्ष पूर्व इस ड्रेन की सफाई कराई गई थी, लेकिन समय के साथ इसमें पुनः सिल्ट और झाड़-झंखाड़ जमा होने से जल निकासी प्रभावित हो गई है।जेई ने जानकारी दी कि ड्रेन को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। रामदास पुलिया से पुरहिया तक का क्षेत्र ऊसर सुधार उन्नाव के अंतर्गत आता है, जबकि पुरहिया से सब्जी तक का हिस्सा ऊसर सुधार प्रतापगढ़ के अधीन है। मीरखनगर से बिजरा ड्रेन तक का भाग शारदा नहर विभाग के कार्यक्षेत्र में है। इसी हिस्से में विभाग द्वारा शुक्रवार से जेसीबी मशीन लगाकर सफाई कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।उन्होंने बताया कि बिजरा ड्रेन के साथ-साथ क्षेत्र की महत्वपूर्ण कांटा ड्रेन की सफाई का कार्य भी जेसीबी मशीन के माध्यम से शुरू किया जाएगा। ड्रेन की सफाई होने से बरसात के मौसम में खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या कम होगी तथा किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी।निरीक्षण के दौरान मौजूद किसानों ने ड्रेन की नियमित सफाई कराने की मांग उठाई और कहा कि वर्षों से सफाई न होने के कारण बरसात में पानी की निकासी बाधित हो जाती है, जिससे खेतों में पानी भर जाता है और फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों ने विभाग द्वारा शुरू किए जा रहे सफाई अभियान का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।इस अवसर पर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के मंडल महामंत्री हरिपाल सिंह सहित बद्रीविशाल बाजपेई, अवधेश शुक्ला, राजेश सिंह, सत्यनारायण समेत कई किसान एवं संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने ड्रेन सफाई कार्य को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा कराने की मांग की, ताकि क्षेत्र के किसानों को स्थायी राहत मिल सके।
