…….विकास के दावों की खुली पोल; जर्जर सरकारी भवनों में जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर कर्मचारी, बड़ी अनहोनी टलने से मचा हड़कंप ।
मोहनलालगंज (लखनऊ)।
राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज विकास खंड मुख्यालय में गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब ब्लॉक परिसर स्थित एडीओ आईएसबी (ADO ISB) कार्यालय कक्ष की फॉल्स सीलिंग (False Ceiling) अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। हादसे के समय कक्ष में मौजूद एडीओ आईएसबी भूपेंद्र रस्तोगी और एनआरएलएम कर्मचारी सपना मलबे और सीलिंग के टूटे हिस्सों की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे ब्लॉक परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों में दहशत फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यालय कक्ष की फॉल्स सीलिंग अचानक तेज आवाज के साथ टूटकर नीचे आ गिरी। सीलिंग के साथ प्लास्टर और अन्य सामग्री भी कर्मचारियों के ऊपर गिर पड़ी, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। सहकर्मियों ने तत्काल राहत कार्य शुरू करते हुए घायलों को बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।
इस हादसे ने ब्लॉक मुख्यालय के भवनों की बदहाल स्थिति की पोल खोलकर रख दी है। कर्मचारियों का कहना है कि परिसर के कई कार्यालय भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में हैं। जगह-जगह सीलिंग क्षतिग्रस्त है, दीवारों में दरारें हैं और कई कमरों की स्थिति असुरक्षित बनी हुई है। इसके बावजूद भवनों के रखरखाव और मरम्मत को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार भवनों की खराब हालत और सुरक्षा संबंधी खतरों से अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। गुरुवार को हुई घटना इसी लापरवाही का नतीजा बताई जा रही है। यदि हादसे के समय कार्यालय में अधिक कर्मचारी या फरियादी मौजूद होते तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।
घटना के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उन्होंने ब्लॉक परिसर के सभी भवनों की तकनीकी जांच कराने, जर्जर एवं असुरक्षित हिस्सों को तत्काल दुरुस्त कराने तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मोहनलालगंज ब्लॉक मुख्यालय में हुई यह घटना सरकारी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। विकास योजनाओं को संचालित करने वाला तंत्र स्वयं यदि असुरक्षित भवनों में काम करने को मजबूर है, तो आम जनता की सुरक्षा और विकास के दावों की वास्तविकता सहज ही समझी जा सकती है।
