अमेठी। भूमि विवाद को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं के बीच अब दूसरा पक्ष भी खुलकर सामने आ गया है। ब्लॉक प्रमुख के समर्थकों और संबंधित पक्ष का कहना है कि बिना पूरे तथ्यों और अभिलेखों की जानकारी लिए जनप्रतिनिधि को विवाद में घसीटना उचित नहीं है।समर्थक पक्ष के अनुसार विवादित संपत्ति का इतिहास कई वर्षों पुराना है। उनका कहना है कि वर्ष 1998 में शिव प्रसाद जायसवाल से भूमि खरीदकर उस पर मकान और दुकान का निर्माण कराया गया था। समय-समय पर दुकानों को किराए पर भी दिया गया और लंबे समय तक किरायेदारों द्वारा व्यवसाय संचालित किया जाता रहा।बताया जा रहा है कि बाद में संपत्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और मामला दीवानी न्यायालय तक पहुंच गया। संबंधित पक्ष का दावा है कि भूमि से जुड़े बैनामा, रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं तथा संपत्ति के स्वामित्व को लेकर विभिन्न स्तरों पर कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई गई।समर्थकों का कहना है कि हाल ही में जर्जर भवन को हटाकर नए निर्माण की तैयारी शुरू होने के बाद कुछ लोगों ने बिना अभिलेखों की पड़ताल किए सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर दिए। उनका कहना है कि यदि किसी पक्ष के पास वैध साक्ष्य हैं तो उन्हें सक्षम न्यायालय या प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।ब्लॉक प्रमुख के समर्थन में सामने आए लोगों का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि को केवल राजनीतिक कारणों से विवादों में घसीटना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि एकतरफा तथ्यों के आधार पर बनाई जा रही धारणाएं समाज में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही हैं।स्थानीय लोगों का भी कहना है कि भूमि विवाद जैसे मामलों में दोनों पक्षों की बात सुनना आवश्यक है। उनका मानना है कि जब तक न्यायालय या प्रशासनिक स्तर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा।इसी बीच समर्थकों ने अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से पहले संबंधित अभिलेखों और वास्तविक तथ्यों की जानकारी अवश्य प्राप्त की जाए, ताकि किसी व्यक्ति अथवा जनप्रतिनिधि की छवि अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो।(नोट: यह समाचार संबंधित पक्ष और समर्थकों द्वारा प्रस्तुत दावों एवं उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। भूमि विवाद से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय अथवा प्रशासनिक प्राधिकरण द्वारा ही किया जाएगा।
