निगोहां।
क्षेत्र के दखिना गांव में आयोजित सात दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास आचार्य जयशंकर शुक्ला जी महाराज ने भगवान शिव की अलौकिक बारात, माता पार्वती की तपस्या तथा राजा हिमाचल के दरबार में हुए विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, त्याग और समर्पण का संदेश दिया।
आचार्य जयशंकर शुक्ला जी ने कहा कि राजा हिमाचल की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने विवाह के लिए सहमति दी। जब भगवान शिव की बारात राजा हिमाचल के महल पहुंची तो उसमें देवताओं के साथ भूत-प्रेत, गण, योगी और शिवगण भी शामिल थे। भगवान शिव का विरक्त और अद्भुत स्वरूप देखकर माता मैना सहित परिवार के लोग आश्चर्यचकित हो गए। बाद में भगवान विष्णु एवं अन्य देवताओं ने शिव के वास्तविक दिव्य स्वरूप का परिचय कराया, जिसके बाद पूरे वैदिक विधि-विधान से शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।

कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि शिव-पार्वती का विवाह यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा, तप, धैर्य और विश्वास से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कथास्थल पर “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु कथा सुनकर भावविभोर हो गए। कथा के उपरांत भगवान शिव की आरती की गई तथा प्रसाद का वितरण हुआ।

सात दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा का आयोजन नेता अनमोल तिवारी के संयोजन में किया जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।

