
लखनऊ। निगोहां थाने पर पिछले कई दशकों से उन तीन गांवों के नाम गैरआबाद की सूची में चल रहे है, जिनका कहीं कोई नामोनिशान तक नही रहा है। इलाके का हर सख्स सूची देखकर हैरान हो जाता है कि कभी इस नाम का गांव भी इलाके में रहा हो किंतु ब्रिटिश शासन से चले आ रहे गांव पुलिस की लिखापढ़ी में अभी भी पढ़े जा रहे है। ये नाम पुलिस की सूची में कैसे दर्ज हो गये है, इसको लेकर लोगो में चर्चाए भी है।, हलांकि पुलिस भी ये मान रही है कि ऐसे गांव कभी नही थे, किंतु पूर्व में इन गांवों का जिक्र दस्तावेजों में था, इसलिए कागजी लिखापढ़ी में तो नाम दर्ज की करना पडेगा।
निगोहां थाने से सम्बन्धित कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन एसएसपी के आदेश पर पुलिस बिटिंग व्यवस्था को लागू किया गया था। यह व्यवस्था लागू होने के बाद निगोहां थाना 4 बीट से बढ़कर 44 बीट का हुआ था। इसी व्यवस्था के तहत रजिस्टर में अंकित तीन गांव,जिनमें उमरी, घाटमपुर, कैथाचक गांवों की श्रेणी में आ गये है। हलांकि पुलिस भी इन गांवों के नाम सिर्फ कागजों पर ही जिंदा किये हुए है। इन गांवों की सूची प्रकाशित होते ही लोगों में तरह-तरह की चर्चाए भी होने लगी है।
निगोहा के बुजुर्गों ने बताया कि
ये पहले कभी गांवो रहें होंगे जिनकी आबादी कहीं चली गई होगी या खत्म हो गई होगी लेकिन गांव के नाम सुने नही कभी। लेकिन लिखा पढ़ी में चल रहे हैं।
एसओ निगोहां अनुज तिवारी ने बताया कि, जो नाम लिखापढ़ी में चल
रहे, उन गांवो के नामों को लिखापढ़ी में जिंदा रखा गया है।
बुजुर्गों ने बताया, 1889 से निगोहां थाना बनाया गया इससे पहले नगराम थाना क्षेत्र में निगोहां था, और यह तीनो गांव बहुत पहले से पुलिस की लिखा पढ़ी में चल रहें हैं
नाम हटाना,बढ़ाना राजस्व विभाग का काम है। राजस्व विभाग की रिर्पोट के बाद ही इन तीन गांवों के नामों को हटाया जाना संभव है। यह गांव पहले कभी रहें होंगे जो आज विलुप्त हो चुके हैं।