मोहनलालगंज।लखनऊ,मोहनलालगंज तहसील में वर्षों से चल रहा खतौनी वितरण में गड़बड़ी का खेल आखिरकार उजागर हो गया। किसानों, आम नागरिकों और अधिवक्ताओं से खतौनी प्राप्त करने के लिए निर्धारित सरकारी मूल्य 15 रुपए के स्थान पर 20 रुपए वसूला जा रहा था। यानी प्रति खतौनी 5 रुपए की अतिरिक्त वसूली तहसील कर्मचारियों द्वारा खुलेआम की जा रही थी।जब यह मामला अधिवक्ताओं द्वारा सुर्खियों में आया, तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। एडीएम प्रशासन की फटकार के बाद तहसील कर्मचारियों की मनमानी पर रोक लगाई गई और आज से खतौनी सरकारी दर 15 रुपए में ही आम नागरिकों को मिलने लगी।हालांकि, सुधार के नाम पर खतौनी काउंटर पर नया नोटिस चस्पा कर दिया गया है। नोटिस में साफ लिखा गया है कि 5 पेज तक की खतौनी का शुल्क 15 रुपए रहेगा।5 पेज से अधिक पन्ने होने पर 1 रुपए प्रति पेज अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। कई वर्षो से 15 रुपए की जगह 20 रुपए वसूल किए जा रहे थे, ऐसे में यह सवाल बड़ा है कि यह अतिरिक्त वसूले गए पैसे आखिर किसकी जेब में जाते थे? क्या यह खेल कर्मचारियों की मिलीभगत से चलता रहा? और इसकी सह किस स्तर से मिली हुई थी?ग्रामीणों और अधिवक्ताओं का कहना है कि जब सालों तक अतिरिक्त 5 रुपए लिए गए तो उसकी जांच कराई जानी चाहिए। केवल वर्तमान में शुल्क घटाकर 15 रुपए करने से जनता संतुष्ट नहीं है। लोगों का साफ कहना है कि यह गोरखधंधा कब से चल रहा था, किसकी शह पर चल रहा था और अब तक करोड़ों रुपए की यह वसूली आखिर गई कहां? इसका पूरा हिसाब-किताब जनता मांग रही है। वही मोहनलालगंज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कौशलेंद्र शुक्ला ने कहा कि एसडीएम की पहल सराहनीय है। उन्होंने आम जनता और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया और तत्काल प्रभाव से व्यवस्था को दुरुस्त किया है।एडीएम की सख्ती और एसडीएम की पहल से हालांकि अब खतौनी सही दर पर मिलने लगी है, लेकिन वर्षों से चली आ रही वसूली पर कार्रवाई और जांच की मांग तेज हो गई है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।
